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भोपाल गैस कांड :अग्निहोत्र यज्ञ से बच थी इस परिवार की जान, जानिए कैसे किया जाता है अग्निहोत्र यज्ञ

Sun, 02 Dec 2018 10:12 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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34 साल पहले 2-3 दिसम्बर 1984 को देश में एक भीषण त्रासदी हुई थी, जिसे भोपाल गैस कांड का नाम दिया गया। मध्य प्रदेश के भोपाल यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी के कारखाने से एक जहरीली गैस का रिसाव हुआ, जिससे लगभग 15000 से अधिक लोगो की जान चली गई और कई लोग शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के भी शिकार हुए, जो आज भी त्रासदी की मार झेल रहे हैं।
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bhopal gas tragedy case study
तबाही की इस काली रात में हजारों परिवारों के बीच भोपाल में कुशवाहा परिवार भी था। पेशे से एस एल कुशवाहा टीचर थे। उनके साथ उनकी पत्नी भी थी। गैस रिसाव के बाद जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया स्थितियां विस्फोटक होती गई। बच्चों की हालत भी खराब होने लगी और बाहर से रोने और शोर-शराबे की आवाजें आने लगीं। बाद में पता चला कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से गैस लीक लगी है। 
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bhopal gas tragedy causes
चारों ओर से आ रही भगदड और भयावह आवाजों के बीच कुशवाहा दंपति भी डर गये। चूंकि कुशवाहा परिवार में रोज सुबह और शाम के वक्त 'अग्निहोत्र यज्ञ' होता था। इसलिए उस काली रात में भी कुशवाहा परिवार ने अग्निहोत्र यज्ञ, त्र्यंबकम होम करना जारी रखा। इसके बाद लगभग 20 मिनट के अंदर ही उनका घर और उसके आस-पास का वातावरण 'मिथाइल आइसो साइनाइड गैस' से मुक्त हो गया। घटना के कुछ दिन बाद जब सबको इस बात की जानकारी हुई तो त्रासदी से बचे पीड़ित लोगों को ठीक करने और वातावरण से 'मिथाइल आइसो साइनाइड गैस' का प्रभाव दूर करने के लिए 'अग्निहोत्र यज्ञ' किया जाने लगा।
 

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bhopal gas tragedy effects
अग्निहोत्र यज्ञ
अग्निहोत्र यज्ञ को आज से हजारों साल पहले केरल के नंबूदरी ब्राह्मण किया करते थे। जिसे आज भी वे पूरी वैदिक रीति रिवाज से किया जाता है। पौराणिक काल से मंदिरों और घरों में नियमित रूप से अग्निहोत्र यज्ञ किया जाता है।
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bhopal gas tragedy pictures
कैसे होता है यज्ञ
अग्निहोत्र यज्ञ को सूरज के ढलते और सूरज के उगते समय ही शुरू किया जाता है। इस प्रकिया में अग्नि को जौ अर्पित करने होते हैं, यज्ञ के दौरान बनाई गई विभूति इंसान और वातावरण, दोनों को ही रोग मुक्त से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है।
 
अग्निहोत्र यज्ञ का जिक्र यजुर्वेद में किया गया है। अग्निहोत्र यज्ञ दो तरह का होता है पहला नित्य और दूसरा काम्य।  अग्नि-स्थापन करके आजीवन प्रातःकाल और सायंकाल नियमपूर्वक हवन करना नित्य कहलाता है जबकि किसी कामना के लिए  हवन करना काम्य कहलाता है।
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conclusion bhopal gas tragedy
अग्निहोत्र यज्ञ के लिए सामग्री
- अग्नि में गाय के घी की कुछ बूंदों से सने दो चुटकी कच्चे चावल (अक्षत) अग्नि में डाले जाते हैं।
- हवन के लिए तांबे के एक अर्ध पिरामिड पात्र में अग्नि प्रज्वलित की जाती है।
- गाय के गोबर से बने कंडों का ही इस्तेमाल किया जाता है।
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भोपाल गैस कांड
सूर्योदय के समय का मंत्र
 'सूर्याय स्वाहा सूर्याय इदम् न मम, प्रजापतये स्वाहा प्रजापतये इदम् न मम'

 
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भोपाल गैस कांड की जानकारी
सूर्यास्त के समय का मंत्र
'अग्नये स्वाहा अग्नये इदम् न मम, प्रजापतये स्वाहा प्रजापतये इदम् न मम’

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