महाभारत के पात्र विदुर की तार्किक नीतियां हर व्यक्ति के जीवन में अपना विशेष महत्त्व रखती है। राजनीति और व्यवहार के सिद्धांतों में जहां चाणक्य नीति का विशेष स्थान है, वही सत्य-असत्य विवेचन की दृष्टि से विदुर नीति का भी अपना विशेष महत्त्व है। विदुर नीति किसी भी व्यक्ति के जीवन में एक सच्चे परामर्श के रूप में सहायक हो सकती है, तो आइए जानते है कि महात्मा विदुर के अनुसार श्रेष्ठ व्यक्ति की क्या पहचान होती है।
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vidur
- फोटो : Social Media
श्रेष्ठ व्यक्ति में दुख सहने की अपार शक्ति होती है, जिससे वो हर मुश्किल में डटकर खड़ा रहता है और वह परमात्मा में विश्वास रखने वाला एक श्रद्धालु भी होता है।
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श्रेष्ठ व्यक्ति हमेशा अच्छे कर्मो को अपनाता है और बुरे कर्मों से दूर रहता है और ऐसा व्यक्ति क्रोध, हर्ष, गर्व, लज्जा, उद्दंडता इत्यादि बुराईयों से दूर रहता है।
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VIDHURA
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श्रेष्ठ व्यक्ति ऐसी वस्तुओं की कामना बिल्कुल नहीं करते हैं, जो दुर्लभ होती है और ना ही खोई हुए वस्तु को लेकर कभी शोक करते है तथा विपदा की घड़ी में सदैव अपने दिमाग से काम लेते हैं।
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VIDHURA
- फोटो : SELF
श्रेष्ठ व्यक्ति किसी भी काम को करने से पहले रूप रेखा तैयार करते हैं तथा काम के बीच में कभी नहीं रुकते और समय को बिल्कुल भी नहीं गंवाते हैं।