देवउठनी एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम और तुलसी के विवाह की परंपरा है। एक कथा के अनुसार तुलसी ने भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया था इसलिए भगवान विष्णु को शालिग्राम बनना पड़ा और इस रूप में उन्होंने माता तुलसी जोकि लक्ष्मी का ही रुप मानी जाती है उनसे विवाह किया। आइए जानते हैं, भगवान विष्णु के रुप शालिग्राम और माता तुलसी से जुड़ी कुछ खास बातें...
विज्ञापन
2 of 11
शालिग्राम भगवान की पूजा
जिस घर में शालिग्राम की रोज पूजा होती है वहां सभी दोष और नकारात्मकता नहीं रहती है।
विज्ञापन
3 of 11
भगवान शालिग्राम की पूजा
जिस घर में भगवान शालिग्राम की पूजा होती है वहां विष्णुजी के साथ महालक्ष्मी भी निवास करती हैं।
4 of 11
शालिग्राम को स्वयंभू माना जाता है
शालिग्राम को स्वयंभू माना जाता है इसलिए कोई भी व्यक्ति इन्हें घर या मंदिर में स्थापित करके पूजा कर सकता है।
विज्ञापन
5 of 11
शालिग्राम के कई रुप होते हैं
शालिग्राम के कई रुप होते हैं, कुछ अंडाकार तो कुछ में छेद होता है और अन्य में शंख, चक्र, गदा या पद्म आदि के निशान भी बने होते हैं।
विज्ञापन
6 of 11
शालिग्राम और तुलसी विवाह
शालिग्राम और भगवती स्वरूपा तुलसी का विवाह करने से सारे अभाव, कलह, पाप, दुःख और रोग दूर हो जाते हैं।
विज्ञापन
7 of 11
तुलसी शालिग्राम विवाह से पुण्य फल प्राप्त होता है
तुलसी शालिग्राम विवाह करवाने से वही पुण्य फल प्राप्त होता है जो कन्यादान करने से मिलता है।
8 of 11
शालिग्राम भगवान पर जल चढ़ाएं
- फोटो : Amar Ujala
पूजा में शालिग्राम पर चढ़ाया हुआ जल भक्त यदि अपने ऊपर छिड़कता है तो उसे सभी तीर्थों में स्नान के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
9 of 11
शालिग्राम भगवान को पंचामृत प्रसाद अर्पित करें
शालिग्राम को अर्पित किया हुआ पंचामृत प्रसाद के रूप में लेने से मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
10 of 11
शालिग्राम और तुलसी विवाह
श्री शालिग्राम और तुलसी का विवाह करने से सारे अभाव, कलह, पाप ,दुःख और रोग दूर हो जाते हैं।