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Ram Navami 2026: रामनवमी पर भगवान श्रीराम के आदर्शों और विचारों से लें प्रेरणा, प्रकाशमय होगा पूरा जीवन

Wed, 25 Mar 2026 02:09 PM IST
Vinod Shukla अनीता जैन ,वास्तुविद

सार

चैत्र माह की नवमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोतम प्रभु श्री राम का जन्मोत्सव बड़ी ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।  जो व्यक्ति अपने जीवन में भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाता है, उसके लिए जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं।
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Ram navami - फोटो : अमर उजाला
Ram Navami 2026: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अवतरण दिवस के रूप में रामनवमी का पावन पर्व सनातन धर्म में अत्यंत श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रभु श्रीराम का नाम अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है। धर्मग्रंथों में वर्णित है कि स्वयं भगवान शिव भी राम नाम का स्मरण करते हैं। ऐसे प्रभु श्री राम का नाम भवसागर से पार तो लगाता है ही साथ ही मनुष्य को समस्त प्रकार के दैहिक,दैविक एवं भौतिक तापों से मुक्ति प्रदान करता है। राम का नाम जहां आध्यात्मिक साधना का माध्यम माना गया है, वहीं उनके आदर्श और आचरण मानव जीवन को मर्यादित, सत्यनिष्ठ और कर्तव्यपरायण बनाने की शिक्षा देते हैं। जो व्यक्ति अपने जीवन में भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाता है, उसके लिए जीवन की कठिन से कठिन राहें भी सरल हो जाती हैं, क्योंकि उनके आदर्श मनुष्य को धैर्य, मर्यादा ,सत्य व सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।
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Ram navami - फोटो : अमर उजाला
सादगी और विनम्रता से भरा श्रीराम का जीवन
प्रभु श्रीराम, राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र रूप में राजमहल में अवतरित हुए, जिनका जन्म धर्म और मर्यादा के दिव्य आरंभ का प्रतीक माना जाता है। राजघराने में जन्म लेने के बाद भी उनका जीवन अत्यंत सरल और संयमित रहा। उनका स्वभाव विनम्र, व्यवहार मधुर और आचरण मर्यादित था। इसी कारण वे केवल एक राजा नहीं, बल्कि आदर्श व्यक्तित्व के रूप में सम्मानित हुए। उनका जीवन सिखाता है कि सच्ची महानता धन और सत्ता से नहीं, बल्कि संस्कार, सदाचार और सरलता से प्राप्त होती है।
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राम नवमी 2026 की शुभकामनाएं - फोटो : Amar Ujala
धर्म और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा
धर्म और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा भगवान राम के चरित्र की सबसे प्रमुख विशेषता है। उनका जीवन सत्य और धर्म के प्रति पूर्ण समर्पित रहा। जब पिता राजा दशरथ को कैकेयी को दिए गए वचनों के कारण उन्हें चौदह वर्ष का वनवास देना पड़ा, तब श्रीराम ने बिना किसी प्रश्न या विरोध के उस निर्णय को बड़े सहज भाव से स्वीकार कर लिया। उन्होंने अपने आचरण से “रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्रान जाहुं बरु बचनु न जाई” की परंपरा को निभाया,जिसमें वचन की मर्यादा को सर्वोपरि माना जाता है। उनका यह त्याग केवल पारिवारिक मर्यादा तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर आने वाली कठिनाइयों को धैर्य और समर्पण के साथ निभाना ही सच्चा धर्म है।

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राम नवमी 2026 की शुभकामनाएं - फोटो : Amar Ujala
संकट में साहस और संयम
वनवास का समय भगवान राम के जीवन का सबसे कठिन दौर था। राजमहल के सुखों में रहने के बावजूद उन्होंने जंगलों में साधारण जीवन व्यतीत करते हुए अनेक कष्टों का सामना किया। सीता हरण जैसी पीड़ा और रावण से युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने धैर्य, साहस और संयम का साथ नहीं छोड़ा। यही कारण है कि उनका जीवन हमें यह सीख देता है कि विपरीत परिस्थितियां मनुष्य की परीक्षा अवश्य लेती हैं, लेकिन जो व्यक्ति अपने सत्य मार्ग पर अडिग रहता है वही सच्चे अर्थों में विजयी होता है। 
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राम नवमी 2026 की शुभकामनाएं - फोटो : Amar Ujala
आदर्श संबंध और रामराज्य 
भगवान राम केवल आदर्श पुत्र ही नहीं, बल्कि आदर्श भाई, पति और राजा के रूप में भी प्रतिष्ठित हैं। अपने भाइयों के प्रति उनका प्रेम और सम्मान अद्वितीय था। माता-पिता के प्रति उनकी आज्ञाकारिता और सीता माता के प्रति उनका समर्पण उनके उच्च चरित्र को बताता है। जब वे अयोध्या के राजा बने, तब उन्होंने प्रजा के हित को सर्वोपरि रखते हुए रामराज्य की स्थापना की, जिसे न्याय, समानता और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। भगवान राम के आदर्श ऐसे प्रकाश स्तंभ की तरह हैं जो मानव जीवन को सदैव प्रकाशित करते हैं और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं।

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