अगर आप चाहते हैं कि आपका धन बढ़े और आप सुख पूर्वक जीवन जीएं तो हमेशा यह दो बातें याद रखें क्योंकि जो इन्हें याद नहीं रखते हैं और अपने धन को बचाने की कोशिश करते रहते हैं उनका धन किसी न किसी रूप में नाश हो जाता है और बाद में पछताते रह जाते हैं।
एक श्लोक में भर्तहरि ने लिखा है- दानं भोगो नाशस्तिस्त्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य। यो न ददाति न भुङ्क्ते तस्य तृतीया गतिर्भवति॥ यानी धन की तीन ही गति होती है। यानी जो धन के साथ ये काम नहीं करते उनके धन का नाश तय है।
धन को नष्ट होने से बचाना है तो इसके लिए सिर्फ दो तरीका है या तो आप धन का दान करें। यानी धन का लेन-देन करें। जरुरतमंदों को दें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो धन को सुख-भोग में उपयोग करें।
जिन लोगों के पास ढ़ेर सारा धन होता है, लेकिन धन का उपभोग नहीं करते हैं। अपने धन को दान धर्म के कार्यो में खर्च नहीं करते हैं उनका धन तेजी से नष्ट होता चला जाता है। इसलिए धन का सदुपयोग करना चाहिए। इसे रोककर नहीं रखना चाहिए।