वेदों में मनुष्यों के लिए चार पुरुषार्थ बताए गए हैं- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। यहां अर्थ से आशय धन और संपत्ति से है। बिना धन के मनुष्य अपनी भौतिक जरुरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। धन से व्यक्ति सामाजिक जीवन में अपनी प्रतिष्ठा को कायम करने में सक्षम बनता है। एक प्रकार से धन समाज में बल का भी प्रतीक है। इसलिए हम सभी अपने आर्थिक जीवन को संपन्न बनाने की कामना ईश्वर से करते हैं। लेकिन धन को लेकर विद्वानों ने जो कहा है वह जानना हमारे लिए महत्वपूर्ण है।