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Vidur niti: ऐसे लोगों को कभी प्राप्त नहीं होता है सुख, सदैव रहते हैं दुखी

Fri, 23 Apr 2021 10:19 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Vidur Neeti - फोटो : Rohit Jha
महाभारत काल में महात्मा विदुर की गिनती बुद्धजीवियों में की जाती थी। ये अत्यंत कुशाग्र बुद्धि, दूरदर्शी और सरल स्वभाव के थे। ये कौरवों और पांडवों के काका और पांडु एवं धृतराष्ट्र के भाई थे परंतु दासी के गर्भ से जन्म लेने के कारण ये राजा नहीं बने। महाराज धृतराष्ट्र विदुर जी से हर विषय पर खुलकर बात किया करते थे और महत्वपूर्ण विषयों में इनसे सलाह भी लेते थे। विदुर जी के द्वारा बताई गई बातें विदुर नीति के रूप में उपलब्ध हैं। विदुर नीति में ऐसे छ लोगों के बारे में बताया गया है जो कभी सुखी नहीं रहते हैं।
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vidur - फोटो : Social Media
ईर्ष्या और घृणा करने वाला
महात्मा विदुर के अनुसार जिस मनुष्य में दूसरों के प्रति घृणा का भाव रहता है वह कभी सुखी नहीं रहता है। ऐसा व्यक्ति दूसरों के सुख को देखकर भीतर ही भीतर दुखी होता रहता है और स्वयं के जीवन में आए सुख को भी नहीं भोग पाता है। ईर्ष्या के कारण ही मनुष्य में घृणा का भाव उत्पन्न होता है, व्यक्ति में पनपने वाली यह भावना उसे कभी भी चैन नहीं लेने देती है।
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vidur niti - फोटो : pinterest
असंतोषी और क्रोधी व्यक्ति
विदुर नीति कहती है कि जिस व्यक्ति में संतोष की भावना नहीं होती है ऐसा व्यक्ति कभी सच्चे सुख का अनुभव नहीं कर पाता है और असंतोष के कारण सदैव दुखी रहता है। इसी तरह से क्रोधी व्यक्ति भी अपने स्वभाव के कारण कभी सुखी नहीं रहता है ऐसे लोगों के मन में अशांति रहती है।
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VIDHURA - फोटो : SELF
शंकित और दूसरों पर आश्रित व्यक्ति
जो व्यक्ति सदैव शंकाओं से घिरा रहता है, वह कभी सुखी नहीं रह पाता है इसी तरह से जो व्यक्ति दूसरों और भाग्य पर आश्रित रहता है, वह कभी सुखी नहीं रह सकता है। भाग्य के भरोसे रहने वाले व्यक्ति अपने जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाते हैं और असफलता के कारण स्वयं को और भाग्य को कोसते रहते हैं। यही उनके दुख का कारण बनता है।
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