invaluable qualities
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अपने आदर्शों के प्रति निष्ठा
हनुमान जी के जीवन में आदर्शों और मूल्यों का बड़ा महत्व था, और उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। लंका में जब रावण के पुत्र मेघनाथ ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, तो हनुमान जी को इससे मरणासन्न स्थिति का सामना करना पड़ा। वे जानते थे कि यदि वह इस अस्त्र का तोड़ निकाल सकते थे, तो भी वे ऐसा नहीं करना चाहते थे। उनका मानना था कि ब्रह्मास्त्र का महत्व और प्रभाव बहुत ही महान है, और वह उसकी महिमा को कम नहीं करना चाहते थे। इसलिए, हनुमान जी ने उस अस्त्र का आघात सहने का निर्णय लिया, जो उन्हें जीवन के लिए घातक भी हो सकता था। तुलसीदास जी ने हनुमान जी की मानसिकता को इस प्रकार व्यक्त किया है-
“ब्रह्मा अस्त्र तेंहि साधा, कपि मन कीन्ह विचार।
जौ न ब्रहासर मानऊं, महिमा मिटाई अपार।।"
यह घटना हमें यह सिखाती है कि आदर्शों और सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए, चाहे स्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो। हनुमान जी का यह कदम उनके ऊंचे नैतिक मूल्यों और उनके जीवन के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है।