महाराज जी ने बताया कि हनुमान जी का हृदय सदैव भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की भक्ति में डूबा रहता है।
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हनुमान जी को सबसे अधिक क्या प्रिय है?
एक भक्त ने प्रेमानंद जी महाराज से सवाल किया कि वह हनुमान जी की बहुत श्रद्धा से पूजा करती हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि हनुमान जी को प्रसन्न कैसे किया जाए और किस नाम का जाप सबसे फलदायी होता है। इस प्रश्न पर महाराज जी ने बहुत सरल लेकिन गहन उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे हम किसी से प्रेम करते हैं तो उसकी पसंद और स्वभाव को जानने की कोशिश करते हैं, उसी प्रकार यदि हमें हनुमान जी को प्रसन्न करना है तो पहले यह समझना होगा कि उन्हें वास्तव में क्या प्रिय है।
महाराज जी ने बताया कि हनुमान जी का हृदय सदैव भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की भक्ति में डूबा रहता है। उन्होंने तुलसीदास जी की पंक्ति का उल्लेख किया, “रामचरित सुनबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया” जिसका अर्थ है कि हनुमान जी को राम कथा सुनना, राम नाम का स्मरण करना और सियाराम के चरित्र का चिंतन करना अत्यंत प्रिय है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि हनुमान जी को राम नाम, राम कथा, और सीता–राम की सेवा व स्मरण सबसे ज़्यादा प्रिय है। वे स्वयं सियाराम के अनन्य भक्त हैं और जिस घर या मन में राम भक्ति होती है, वहाँ हनुमान जी बिना बुलाए भी उपस्थित रहते हैं। इसलिए हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है राम नाम का जाप, रामचरितमानस का पाठ और राम-कथा सुनना।