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Geeta Gyan: श्रीकृष्ण के ये उपदेश जीवन भर करेंगे आपका मार्गदर्शन

Fri, 07 Feb 2025 08:00 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गीता के उपदेश श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन को दिए थे, जब अर्जुन धर्म और कर्तव्य के बीच द्वंद्व की स्थिति में थे। श्रीकृष्ण के इन अनमोल विचारों ने न केवल अर्जुन को धर्मयुद्ध के लिए प्रेरित किया, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए भी एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य किया। 
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श्रीकृष्ण के अनमोल उपदेश - फोटो : freepik
Geeta Ka Gyan: श्रीमद्भागवत गीता हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए उपदेशों का विस्तृत वर्णन मिलता है। आज के समय में भी गीता में दिए गए उपदेश उतने ही महत्व रखते हैं जितने उस युग में थे। यह ग्रंथ न केवल आध्यात्मिक रूप से बल्कि नैतिक और मानसिक रूप से भी व्यक्ति को सशक्त बनाता है। इसके उपदेशों का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है, और वह सही दिशा में आगे बढ़ता है।

श्रीकृष्ण के अनमोल उपदेश
1. भय को पार करना:

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि यदि कोई कार्य करते समय भय का अनुभव हो, तो यह इस बात का संकेत है कि उस कार्य के लिए वास्तव में साहस और दृढ़ संकल्प की जरूरत है। जो व्यक्ति अपने भय को दूर कर आगे बढ़ता है, वही सच्ची सफलता प्राप्त करता है। इसलिए, जीवन में किसी भी चुनौती से डरने के बजाय, उसका सामना पूरे आत्मविश्वास के साथ करना चाहिए।
 

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दृष्टिकोण और भावनाएं - फोटो : Amar Ujala
2. दृष्टिकोण और भावनाएं
गीता के अनुसार, हमारी आंखें केवल देखने का माध्यम हैं, लेकिन हम क्या और कैसे देखते हैं, यह पूरी तरह से हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। यदि यह सकारात्मक होगा, तो हमें हर चीज में अच्छाई नजर आएगी। वहीं अगर हमारे मन में नकारात्मकता है, तो हम हर परिस्थिति में बुराई देखेंगे। इसलिए जीवन में हमेशा एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए।
 

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ईश्वर में समर्पण - फोटो : freepik
3. ईश्वर में समर्पण
श्रीकृष्ण के अनुसार मनुष्य को स्वयं को पूरी तरह ईश्वर में समर्पित कर देना चाहिए, क्योंकि इस संसार में कोई भी किसी का स्थायी रूप से साथ नहीं देता। मनुष्य को अपने कर्म को बिना किसी स्वार्थ के करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि इस संसार में किसी भी वस्तु या व्यक्ति पर पूर्ण अधिकार संभव नहीं है।

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त्याग से मिलने वाला आनंद - फोटो : iStock
4. त्याग से मिलने वाला आनंद
भोग से प्राप्त होने वाला सुख हमेशा क्षणिक होता है, जबकि त्याग में स्थायी आनंद पाया जाता है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि सज्जनों की संगति परमात्मा की कृपा से मिलती है और इससे व्यक्ति का जीवन उन्नति की ओर बढ़ता है। वहीं कुसंगति व्यक्ति को पतन की ओर ले जाती है। इसलिए हमेशा सही संगति का चयन करना चाहिए।
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जीत और हार का रहस्य - फोटो : freepik
5. जीत और हार का रहस्य
भगवद गीता में श्रीकृष्ण बताते हैं कि जीत और हार पूरी तरह हमारी सोच और विश्वास पर निर्भर करती है। यदि हम सोचते हैं कि हम हार जाएंगे, तो हमारी हार निश्चित है। यदि हम ठान लें कि हमें जीतना है, तो कोई भी शक्ति हमें हरा नहीं सकती। यह विचार जीवन में आत्मविश्वास और सफलता प्राप्त करने के लिए बेहद आवश्यक है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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