इस समय पूरे देश में गणेश उत्सव का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। गणेश महोत्सव की शुरुआत 25 अगस्त से हुईं थी। यह पर्व 10 दिनों तक चलता है और इस बार यह 5 सितंबर तक रहेगा। लोग गणेश चतुर्थी वाले दिन से अपने घरों में गणपति को स्थापित करते है फिर एक दिन, तीन दिन, पांच दिन और दस दिनों बाद गणेश जी का विसर्जन करते है। गणेश महोत्सव के दौरान आखिरकार गणपति का विसर्जन क्यों करते है आइए जानते है।
पढ़ें- गणेश उत्सव में 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे क्यों लगाए जाते हैं, जानिए इसके कारण
विज्ञापन
2 of 5
गणेश उत्सव के दौरान गणेशजी की प्रतिमा का विसर्जन के पीछे पुराणों में कारण बताया गया है। महर्षि वेदव्यास ने गणेश चतुर्थी के दिन से भगवान गणेश को महाभारत की कथा सुनाना शुरू किया था। लगातार दस दिनों तक वेदव्यास आंखे बंद कर भगवान गणेश को कथा सुनाते रहे और गणेशजी उसे बिना रूके उसे लिखते रहें।
विज्ञापन
3 of 5
दस दिनों के बाद जब कथा पूरी हुई तो वेदव्यास ने आंखे खोली तो देखा कि लगातार लिखते हुए गणेशजी के शरीर का तापमान तेज हो गया था तब गणेशजी के तापमान को कम करने के लिए वेदव्यास ने तालाब में गणेश जी को स्नान कराते हैं। जिस दिन उन्होनें गणेश जी को स्नान कराया गया था उस दिन अनंत चर्तुदशी था इसलिए इस दिन से गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाना लगा।
4 of 5
गणेशजी के विसर्जन के पूर्व भगवान गणेश जी विधिवत आरती करें और उनसे धन,सुख,शांति-समृद्धि का आशीर्वाद मांगे इसके बाद नदी,तालाब में उनका विसर्जन करें।
अगर आप घर में गणेश जी का विसर्जन करना चाहते है तो एक गमले में पानी भरकर उसमे गणेश जी को विसर्जित करें और उसके बाद उसमें मिट्टी डालकर पौधा लगा दें, लेकिन उस गमले मे कभी तुलसी का पौधा न लगाएं क्योंकि तुलसी भगवान गणेश जी नहीं चढ़ाई जाती है।