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गांधी जयंती: धार्मिक लोग अपनी पूरी जिंदगी जीते हैं

Wed, 25 Sep 2019 10:12 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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महात्मा गांधी - फोटो : अमर उजाला
गांधी जी ने इस बात पर हमेशा जोर दिया कि भगवान ही सत्य है। साधारण हिंदू की तरह वे सारे धर्मों को समान रूप से मानते थे। उन्होंने धर्म-परिवर्तन के सभी तर्कों एवं प्रयासों को अस्वीकृत किया। धर्म को लेकर उनके और क्या-क्या विचार थे इस लेख के माध्यम से जानते है।
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Mahatma Gandhi - फोटो : social media
महात्मा गांधी जी के अनुसार परमात्मा का कोई धर्म नहीं होता है। जो व्यक्ति दूसरो के दुख दर्द को समझता है असली धार्मिक वही है। साधारण हिंदू की तरह वे सारे धर्मों को समान रूप से मानते थे।
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mahatma gandhi
धर्म के लिए लोग अपनी पूरी उम्र जीते हैं। उनका धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित था। गांधी जी के लिए सत्य ही उनका भगवान था। उनके अनुसार अहिंसा भगवान को पाने का सबसे बेहतर साधन है।

 

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
धर्म जीवन की तुलना में अधिक है। अपना धर्म ही परम सत्य है।  जो लोग कहते है की धर्म का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है वह यह नहीं जानते है की धर्म है क्या।  

 
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Mahatma Gandhi - फोटो : social media
सभी सिद्धांतों को सभी धर्मों के इस तार्किक युग में तर्क की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा और सार्वभौमिक स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। किसी व्यक्ति का धर्म उसके और उसके बनाने वाले के बीच का मामला है और किसी का नहीं। वो धर्म नहीं है जो व्यावहारिक मामलों पर ध्यान नहीं देता और उन्हें हल करने में कोई मदद नहीं करता है।
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