धार्मिक विचारधार ने कैसे आकर्षित किया
डॉ. राधाकृष्णन बचपन से ही जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे उन्होंने हिन्दू धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों का गहन अध्ययन प्रारम्भ कर दिया।
राधाकृष्णन ये जानना चाहते थे कि किस संस्कृति के विचारों में चेतना है। उन्होंने जब अध्ययन करना प्रारम्भ किया तो देखा हिन्दू संस्कृति का ज्ञान एक अनपढ़ व्यक्ति को भी है और पाया कि हिन्दू धर्म कि नींव काफी पुरानी है।
यही नहीं हर बात जो ग्रंथों में कही गई है उसके पुख्ता प्रमाण हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने ये जान लिया था कि भारतीय संस्कृति काफी समृद्धि है। दूसरे धर्मों के लोगों के तर्क और विचार हिन्दू संस्कृति के लिए गलत और निराधार है।
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