फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

chhath parv 2019: सूर्य से सीखें लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना

विज्ञापन
1 of 6
सूर्य को वेदों में जगत की आत्मा और ईश्वर का नेत्र बताया गया है। सूर्य को जीवन, स्वास्थ्य एवं शक्ति के देवता के रूप में मान्यता हैं। सूर्यदेव की कृपा से ही पृथ्वी पर जीवन बरकरार है। ऋषि-मुनियों ने उदय होते हुए सूर्य को ज्ञान रूपी ईश्वर बताया है। सूर्य का शब्दार्थ है सर्व प्रेरक.यह सर्व प्रकाशक, सर्व प्रवर्तक होने से सर्व कल्याणकारी है। सूर्योपनिषद में सूर्य को ही संपूर्ण जगत की उतपत्ति का एक मात्र कारण निरूपित किया गया है और उन्ही को संपूर्ण जगत की आत्मा तथा ब्रह्म बताया गया है। सूर्योपनिषद की श्रुति के अनुसार संपूर्ण जगत की सृष्टि तथा उसका पालन सूर्य ही करते है। सूर्य ही संपूर्ण जगत की अंतरात्मा हैं। आइए, आज जानते है सूर्य की वो विशेषताएं, जिनसे हमें जीवन जीने के नए तरीके मिलेंगे।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 6
लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना
सूर्य से हमें लक्ष्य की ओर बिना रुके चलने की प्रेणना मिलती है। सूर्य बिना रुके हमेशा चलते रहता है, चाहे वातावरण कैसा भी हो।
विज्ञापन

3 of 6
परिस्थितियों से लड़ना
सूर्य से हमें परिस्थितियों से लड़ना सीखना चाहिए। जब भी सूर्य पर ग्रहण लगता है, वह इन परिस्थितियों से घबराता नहीं है , डट कर उन परिस्थितियों का सामना करता है।  

4 of 6
- फोटो : योगेश कुशवाहा
समानता का भाव
सूर्य किसी से भी भेदभाव नहीं करता है, वह अपनी रोशनी सबको प्रदान करता है।
विज्ञापन

5 of 6
- फोटो : योगेश कुशवाहा
निरहंकारी 
धार्मिक ग्रंथो के अनुसार सूर्य को वेदों में जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है। इस बात का सूर्य देव कोई अहंकार नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
हर कर्म निष्ठा से करना
सूर्य देव से हम कर्म के प्रति निष्ठा भाव सिख सकते हैं। सूर्य देव अपना कार्य पूरी निष्ठा ओर लगन से करते हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें