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Chanakya Niti: अपनी इन आदतों को त्यागें, वरना वैवाहिक जीवन बन जाएगा नरक

Mon, 14 Mar 2022 11:29 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चाणक्य नीति के अनुसार कुछ ऐसी आदते हैं, जो दांपत्य जीवन में कलह का कारण बन सकती हैं। - फोटो : अमर उजाला
Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य अपनी रणनीतियों को लेकर विख्यात हैं। वो चाणक्य ही थे जिन्होंने अपनी नीतियों के दम पर ही एक साधारण से बालक चंद्रगुप्त मौर्य को मगध का सम्राट बना दिया था। आचार्य चाणक्य ने अपनी इन नीतियों की समझ के आधार पर ही नीति शास्त्र की रचना की थी। नीतिशास्त्र की बातें लोगों को कटु अवश्य लगती हैं, लेकिन यह जीवन की सच्चाई से अवगत कराती है। चाणक्य द्वारा रचित नीतिशास्त्र में जीवन के हर क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण बातों का जिक्र है। अगर कोई व्यक्ति इन बातों का ध्यान रखता है तो व्यक्ति समस्याओं से तो बच ही सकता है साथ ही एक संतुष्ट और सफल जीवन भी व्यतीत कर सकता है। चाणक्य नीति में रिश्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातों का भी जिक्र मिलता है जिसे मनुष्य यदि अपने जीवन में उतार ले तो उससे ज्यादा सुखी इंसान इस धरती पर कोई नहीं है। पति-पत्नी का रिश्ता काफी महत्वपूर्ण होता है और साथ ही मजबूत भी क्योंकि वह हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ निभाते हैं। चाणक्य नीति के अनुसार कुछ ऐसी आदते हैं, जो दांपत्य जीवन में कलह का कारण बन सकती हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो आदतें…
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चाणक्य नीति के अनुसार पति-पत्नी के रिश्ते को गुस्सा बुरी तरह से प्रभावित करता है। - फोटो : istock
गुस्से से होता है वैवाहिक जीवन प्रभावित 
चाणक्य नीति के अनुसार पति-पत्नी के रिश्ते को गुस्सा बुरी तरह से प्रभावित करता है। जब व्यक्ति गुस्से में होता है तो अच्छा या बुरा समझ नहीं पाता और गुस्से में अपना नुकसान कर बैठता है। वैवाहिक जीवन में यही छोटी-छोटी बाते बड़ा रूप ले लेती हैं जिसका परिणाम बुरा होता है। इसलिए व्यक्ति को अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए।
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वैवाहिक जीवन में तो धोखे की जगह बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। - फोटो : istock
धोखे से संबंध होते हैं खराब 
आचार्य चाणक्य के अनुसार रिश्ता कोई भी हो धोखा नहीं देना चाहिए। वैवाहिक जीवन में तो धोखे की जगह बिल्कुल नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह रिश्ता एक विश्वास पर ही टिका होता है और एक बार अगर भरोसा टूट जाए तो विवाह जैसा पवित्र रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। इसलिए हमेशा अपने रिश्ते के प्रति ईमानदार रहना पति और पत्नी दोनों का कर्तव्य है। 

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यदि पति-पत्नी एक दूसरे से संवाद स्थापित नहीं करते तो जीवन में कलह होने से कोई रोक नहीं सकता। - फोटो : istock
आपस में बातचीत न होना
आचार्य चाणक्य के अनुसार पति- पत्नी का रिश्ता ऐसा होता है जिसमें एक दूसरे से सुख-दुख बांटने चाहिए। इसके लिए एक दूसरे से संवाद करना बहुत आवश्यक है। यदि कोई बात बुरी लग रही है तो उसे उनसे स्पष्ट करें मन में न रखें। यदि पति-पत्नी एक दूसरे से संवाद स्थापित नहीं करते तो जीवन में कलह होने से कोई रोक नहीं सकता और रिश्ता कमजोर होता चला जाता है।
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चाणक्य के नीति शास्त्र के अनुसार पति और पत्नी का रिश्ता एक दूसरे के बिना अधूरा है। - फोटो : istock
आपस में सम्मान होना चाहिए
चाणक्य के नीति शास्त्र के अनुसार पति और पत्नी का रिश्ता एक दूसरे के बिना अधूरा है। यदि इस रिश्ते को बरकरार रखना है तो इसके लिए पति और पत्नी दोनों को एक दूसरे के प्रति सम्मान की दृष्टि बनाकर रखनी चाहिए। यदि आपके रिश्ते में ऐसा नहीं है तो आपका वैवाहिक जीवन नरक से भी बदतर हो सकता है और  ऐसे रिश्ते में रहने का कोई लाभ नहीं है। 
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