Chanakya Niti
- फोटो : freepik
सिंहादेकं बकादेकं शिक्षेच्चत्वारि कुक्कुटात्।
वायसात्पञ्च शिक्षेच्च षट्शुनस्त्रीणि गर्दभात् ।।
आचार्य चाणक्य के इस श्लोक का अर्थ है कि इसांन को हमेशा शेर और बगुले से एक-एक, मुर्गे से चार, कौए से पांच, कुत्ते से छह और गधे से तीन गुण सीखने चाहिए। उनका मानना है कि अगर आप इस संसार में प्रत्येक वस्तु और प्रत्येक प्राणी ये कुछ-न कुछ सीखते हैं, तो जीवन में सफलता, उन्नति और विकास आसानी से किया जा सकता है।