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Chanakya Niti: जब बार-बार मिलने लगे असफलता, तो आचार्य चाणक्य की इन बातों का रखें ध्यान

Fri, 11 Apr 2025 05:37 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chanakya Niti: जीवन में हर व्यक्ति सफलता पाने की रेस में दौड़ता है। इस दौरान कुछ लोग आगे, तो कुछ पीछे रह जाते हैं। आगे जाने वाले हमेशा अपने लक्ष्यों को पूरा कर लेते हैं। 
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जीवन में हर व्यक्ति सफलता पाने की रेस में दौड़ता है। इस दौरान कुछ लोग आगे, तो कुछ पीछे रह जाते हैं। - फोटो : अमर उजाला
Chanakya Niti: जीवन में हर व्यक्ति सफलता पाने की रेस में दौड़ता है। इस दौरान कुछ लोग आगे, तो कुछ पीछे रह जाते हैं। आगे जाने वाले हमेशा अपने लक्ष्यों को पूरा कर लेते हैं। परंतु पीछे रह जाने वाले अक्सर तनाव से घिर जाते हैं। हालांकि इसका अर्थ है यह नहीं कि वह नाकाम है। दरअसल, कई बार दिन रात कड़ी मेहनत के बाद भी मनचाहे परिणामों की प्राप्ति नहीं होती हैं। ऐसे में मन में लगातार नकारात्मकता का भाव बना रहता है। ये भाव व्यक्ति की सोच को प्रभावित व उसकी कार्यक्षमता पर गहरा असर डालता है। ऐसी परिस्थिति में स्वयं को सकारात्मक बनाए रखना अपने में बड़ी चुनौती हैं।

आप इस परिस्थिति में आचार्य चाणक्य की बातों का ध्यान भी कर सकते हैं, इससे जीवन को नए मार्गदर्शन व आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। बता दें, आचार्य चाणक्य की गणना महान विद्वानों के रूप में की जाती है, उन्होंने चाणक्य नीति नामक ग्रंथ की रचना कि है, जिसमें मनुष्य जीवन से लेकर उसकी सफलता-असफलता का भलिभांति जिक्र है। इस नीति शास्त्र में उन बातों का भी उल्लेख हैं, जो लक्ष्य को पूरा करने से पहले व्यक्ति को अपने मस्तिष्क में रखनी चाहिए। आइए इसके बारे में जानते हैं
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Chanakya Niti - फोटो : freepik
प्रभूतं कार्यमल्पं वा यन्नरः कर्तुमिच्छति । 
सर्वारम्भेण तत्कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते ।। 

 
इस श्लोक का अर्थ है कि शिकार बड़ा हो या छोटा। लेकिन सिंह हमेशा पूरी शक्ति से शिकार पर झपटता है। ठीक वैसे ही काम छोटा हो या बड़ा व्यक्ति को उसे पूरा करने में अपनी पूरी शक्ति लगानी चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं, तो परिणाम पक्ष में आ सकते हैं।
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Chanakya Niti - फोटो : freepik
सिंहादेकं बकादेकं शिक्षेच्चत्वारि कुक्कुटात्।
वायसात्पञ्च शिक्षेच्च षट्शुनस्त्रीणि गर्दभात् ।। 

आचार्य चाणक्य के इस श्लोक का अर्थ है कि इसांन को हमेशा शेर और बगुले से एक-एक, मुर्गे से चार, कौए से पांच, कुत्ते से छह और गधे से तीन गुण सीखने चाहिए। उनका मानना है कि अगर आप इस संसार में प्रत्येक वस्तु और प्रत्येक प्राणी ये कुछ-न कुछ सीखते हैं, तो जीवन में सफलता, उन्नति और विकास आसानी से किया जा सकता है।

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Chanakya Niti - फोटो : Adobe stock photos
।। नास्ति देहिनां सुखदुःखाभावः ।। 
 
इस श्लोक का अर्थ है कि जिस प्रकार जीवन में मनुष्य का बीमार रहना दुख है और स्वस्थ रहना बड़ा सुख। ठीक वैसे ही सफलता और असफलता भी मानव जीवन के दो पहलू हैं। इसलिए इसे स्वीकार करें और अपने लक्ष्यों के प्रति प्रयासरत रहें।
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Chanakya Niti - फोटो : adobe stock
मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत् । 
मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्य चापि नियोजयेत् ।।

 
चाणक्य नीति के अनुसार आपने जो भी काम ठान लिया है, उसे जब तक किसी को नहीं बताना चाहिए, जबतक की वह पूरा न हो जाए। उनका मानना है कि व्यक्ति को अपने सपनों और लक्ष्यों को किसी के सामने उजागर नहीं करना चाहिए। बल्कि मन में रखकर उन्हें पूरा करने का कठोर प्रयास करें।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 
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