आचार्य चाणक्य
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जो आपके साथ किसी भी परिस्थिति में लज्जित महसूस न करे
चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति आपका धन नष्ट हो जाने पर भी आपके साथ कहीं जाने पर लज्जित न महसूस करे। अपने पद और धन पर घमंड न करे। वही सच्चा मित्र होता है। जो अपने पद और धन का अहंकार करते हैं और निर्धन मित्र के साथ रहने से कतराते हैं, उन्हें के धन से लगाव होता है। वे कभी सच्चे मित्र नहीं हो सकते हैं।