शादी जीवन का एक बड़ा फैसला है, इसलिए केवल पहली मुलाकात में अच्छा लगना, अच्छी नौकरी या आकर्षक व्यक्तित्व किसी व्यक्ति को जीवनसाथी चुनने का एकमात्र आधार नहीं होना चाहिए। किसी इंसान की असली सोच और स्वभाव को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि वह रोजमर्रा की परिस्थितियों में कैसा व्यवहार करता है। खासकर गुस्सा आने पर उसका रवैया, दूसरों के प्रति उसका सम्मान और जिम्मेदारियों को लेकर उसकी सोच बहुत कुछ बता सकती है।
आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में भी जीवनसाथी के चयन के दौरान व्यक्ति के गुण, आचरण और चरित्र को महत्व देने की बात कही है। हालांकि, चाणक्य नीति प्राचीन समय की विचारधारा है और आज के रिश्तों की परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए इन बातों को मार्गदर्शन के रूप में समझना चाहिए और शादी का निर्णय आपसी समझ, बातचीत तथा वास्तविक व्यवहार को देखकर ही लेना चाहिए।