चाणक्य नीति शास्त्र में मनुष्य के कल्याण हेतु ऐसी कई बातें हैं जिनका पालन कर व्यक्ति सफलता की ऊंचाई को छू सकता है। इस नीति ग्रंथ में सूत्रों के रूप में आचार्य चाणक्य के ज्ञान और अनुभव का भंडार है जो लोगों के लिए बेहद ही कल्याणकारी है। उदाहरण के लिए चाणक्य नीति के इस श्लोक बताया गया है कि किन लोगों के घर में दरिद्रता बनी रहती है।
कुचैलिनं दन्तमलोपधारिणं बह्वाशिनं निष्ठुरभाषिणं च।
सूर्योदये चास्तमिते शयानं विमुञ्चतिश्रीर्यदि चक्रपाणि:।।