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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य के इन श्लोकों से जानें जीवन में कैसे पाएं सफलता, नहीं होगी धन की भी कमी

Mon, 22 Dec 2025 08:17 PM IST
सोनिया चौहान धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आचार्य चाणक्य ने सदैव अपनी नीतियों से समाज का मार्गदर्शन किया। चाणक्य नीति के अनुसार हर व्यक्ति जीवन में सफलता हासिल करना चाहता है।आइए जानते हैं कि आचार्य चाणक्य के इन श्लोकों से जीवन में कैसे सफलता पा सकते हैं।

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आचार्य चाणक्य की नीतियां - फोटो : Amar Ujala
Chanakya Niti Sucess Sutras: आचार्य चाणक्य न केवल एक उत्कृष्ट विद्वान हैं, बल्कि एक अच्छे शिक्षक भी माने जाते हैं। आचार्य चाणक्य ने विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की थी और आचार्य के रूप में उन्होंने वहां छात्रों का पर्यवेक्षण भी किया था। वह न केवल एक अनुभवी राजनयिक थे, बल्कि एक उत्कृष्ट रणनीतिकार और अर्थशास्त्री भी थे। आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना किया लेकिन कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को हासिल किया।
 
यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में आचार्य चाणक्य की बातों का पालन करता है तो वह जीवन में कभी गलती नहीं करेगा और एक सफल मुकाम हासिल कर सकेगा। आचार्य चाणक्य ने सदैव अपनी नीतियों से समाज का मार्गदर्शन किया। चाणक्य नीति के अनुसार हर व्यक्ति जीवन में सफलता हासिल करना चाहता है। वह कामना करते हैं कि सुख, समृद्धि, धन और यश सदैव बना रहे। आइए जानते हैं कि आचार्य चाणक्य के इन श्लोकों से जीवन में कैसे पाएं सफलता। 
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चाणक्य नीति - फोटो : Amar Ujala
आपदर्थे धनं रक्षेद्दारान् रक्षेध्दनैरपि ।
नआत्मानं सततं रक्षेद्दारैरपि धनैरपि ।।

चाणक्य के अनुसार, भविष्य में आने वाली समस्याओं से बचने के लिए व्यक्ति को धन की बचत करनी चाहिए। भले ही उसे अपनी संपत्ति छोड़नी पड़े, उसे अपनी पत्नी की रक्षा करनी चाहिए। लेकिन जब आत्मा की सुरक्षा की बात आती है तो उसे धन और पत्नी दोनों को महत्वहीन समझना चाहिए। 
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चाणक्य नीति - फोटो : Amar Ujala
यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवः ।
न च विद्यागमऽप्यस्ति वासस्तत्र न कारयेत् ।।

चाणक्य के अनुसार, लोगों को ऐसे देश में नहीं रहना चाहिए जहां उनका सम्मान न हो,जहां नौकरी के अवसर नहीं हैं।  लोगों को वहां भी नहीं रहना चाहिए जहां कोई दोस्त न हो। आपको उन जगहों से भी दूर रहना चाहिए जिन्हें आप नहीं जानते और जिस स्थान पर ज्ञान की  कमी हो। 


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चाणक्य के मुख्य सिद्धांत - फोटो : Amar Ujala
जानीयात् प्रेषणे भृत्यान् बान्धवान् व्यसनागमे ।
मित्रं चापत्तिकाले तु भार्यां च विभवक्षये ।।

चाणक्य के अनुसार,  सेवक की परीक्षा तब होती है जब वह बुरे समय से गुजरता है। परिवार के सदस्यों की परीक्षा तब होती है जब वे जीवन में कठिनाइयों से घिरे होते हैं। संकट के समय ही मित्र की परीक्षा होती है। और पत्नी की परीक्षा तब होती है जब आपके साथ कोई दुर्भाग्य घटित होता है। इसका मतलब है कि मुश्किलों में कौन आपका साथ देगा और कौन नहीं ऐसे लोगों की पहचान की जाती है। 
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चाणक्य नीति - फोटो : Amar Ujala
अधीत्येदं यथाशास्त्रं नरो जानाति सत्तमः ।
धर्मोपदेशं विख्यातं कार्याऽकार्य शुभाऽशुभम् ।।
 
चाणक्य के अनुसार, मनुष्य निरन्तर शास्त्र के नियमों का पालन करके ही शिक्षा प्राप्त करता है। उसे सही, गलत और लाभकारी कार्यों का अच्छा ज्ञान हो जाता है। ऐसे व्यक्ति के पास सर्वोत्तम ज्ञान होता है। इसका मतलब यह है कि ऐसे लोग जीवन में बड़ी सफलता हासिल करते हैं और बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को भी आसानी से पार कर लेते हैं।





डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।  
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