मां के गर्भ में ही तय होते हैं शिशु की किस्मत के ये फैसले
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आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च ।
पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ।।
अर्थ- समस्त देहधारी प्राणियों की आयु, उनके द्वारा किए जाने वाले कर्म (कार्य ), धन , विद्या तथा मृत्यु का समय उनकी गर्भावस्था में ही पूर्वनिर्धारित हो जाता है।