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Bhagavad Gita: हर उम्र के व्यक्ति को माननी चाहिए गीता में लिखी ये 5 महत्वपूर्ण बातें

Mon, 24 Nov 2025 12:20 AM IST
सोनिया चौहान धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Gita Shlok: हजारों वर्षों पुरानी भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आत्मिक और मानसिक संघर्षों के समाधान का गहरा विज्ञान है। आइए जानते हैं गीता के ऐसे 5 श्लोक, जो हर उम्र के व्यक्ति के लिए लाभकारी हैं। 
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गीता के उपदेश - फोटो : Adobe stock
Bhagavad gita Shlokas: आज के इस भागदौड़ भरे दौर में हम सभी किसी न किसी रूप में तनाव, बेचैनी और गुस्से का सामना करते हैं। ऐसे में नींद न आना मानसिक अशांति और क्रोध जीवन का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हजारों वर्षों पुरानी भगवद गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आत्मिक और मानसिक संघर्षों के समाधान का गहरा विज्ञान है। जब अर्जुन युद्ध के मैदान में मानसिक रूप से टूट चुके थे और तब श्रीकृष्ण ने उन्हें जो ज्ञान दिया, वह आज के समय में भी मेंटल हेल्थ थेरेपी की तरह काम कर सकता है। आइए जानते हैं गीता के ऐसे 5 श्लोक, जो हर उम्र के व्यक्ति के लिए लाभकारी हैं। 
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भगवद गीता श्लोक - फोटो : freepik
1. कर्म करें फल की इच्छा न करें

गीता के अनुसार, हमें सिर्फ अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से मन शांत रहता है और तनाव भी नहीं होता है। युद्ध में अर्जुन के विचलित हो जाने पर भगवान कृष्ण ने कहा था कि हर मनुष्य को कर्म करना चाहिए, फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए. जैसा आपका कर्म होगा ईश्वर आपको उसके अनुरूप ही फल देंगे। 
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भगवद गीता श्लोक - फोटो : adobe stock
2. सुख-दुख में एक समान रहना

गीता के अनुसार, व्यक्ति को इंद्रियों और विषयों के संयोग से उत्पन्न होने वाले सुख और दुख के प्रति समभाव रखना चाहिए, जिससे मन अशांत न हो और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर हो सके। जीवन में सुख और दुख आते-जाते रहते हैं। इन दोनों स्थितियों में समान भाव बनाए रखना महत्वपूर्ण है। सुख में अहंकारी और दुख में विचलित नहीं होना चाहिए। 

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भगवद गीता श्लोक - फोटो : freepik
3. स्वार्थ के बिना कर्म करना

जब हम किसी काम को स्वार्थ या किसी चाहत के साथ करते हैं, तो मन अस्थिर रहता है। इसलिए बिना स्वार्थ के कर्म करने से मन को शांति मिलती है। गीता के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक क्षण के लिए भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता क्योंकि प्रकृति के गुणों से प्रेरित होकर सभी कर्म करने के लिए बाध्य हैं। 
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भगवद गीता - फोटो : Freepik
4. ईश्वर में विश्वास रखना

भगवान पर विश्वास रखो सब कुछ ठीक हो जाएगा। गीता के अनुसार, भगवान पर भरोसा रखने वाला व्यक्ति ज्यादा विचलित नहीं होता है। मन को स्थिर रखने के लिए ईश्वर में विश्वास रखना बेहद जरूरी है।
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भगवद गीता श्लोक - फोटो : adobe stock
5. ज्ञान प्राप्त करना 

गीता के अनुसार, ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश करते रहना चाहिए। ज्ञान से मन स्थिर और एकाग्र रहता है। श्रीमद भागवत गीता में 700 श्लोक हैं जो पूरी दुनिया का ज्ञान देते हैं। जीवन से संबंधित ऐसा कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान मां गीता में नहीं है पर हर आदमी अपनी अपनी समझ के हिसाब से गीता से ज्ञान प्राप्त कर सकता है। 





डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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