शिष्य के मन में सीखने की इच्छा को जो जागृत कर पाते हैं वे ही शिक्षक कहलाते हैं। हिन्दू धर्म में शिक्षक के बारे में कहा गया है कि 'आचार्य देवो भव:' अर्थात् शिक्षक या आचार्य ईश्वर के समान होता है। कबीर भी यही कहते हैं कि गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।। गुरु या फिर कहें शिक्षक को ईश्वर से बड़ा दर्जा उसके उसके द्वारा समाज में दिए गए योगदानों के बदले स्वरूप दिया जाता है। शिक्षक स्वयं कभी बुलंदियों पर नहीं पहुचते लेकिन बुलंदियों पर पहुंचाने वालों को तैयार शिक्षक ही करते हैं। आइए आगे की स्लाइड्स में जानते हैं ऐसे ही पूज्य गुरुओं के प्रति महान हस्तियों के अनमोल वचन —