आचार्य चाणक्य
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आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में इस श्लोक के माध्यम से बताया है कि वह कौन-सी छः परिस्थितियां हैं जब मनुष्य को जीते जी आग में जलाने के समान महसूस होता है।
कांता-वियोग: स्वजनामानो,ऋणस्य शेष: कुनृपस्य सेवा।दरिद्रभावो विषमा सभा च,विनाग्निना ते प्रदहन्ति कायम्।।
पत्नी या प्रेमिका से वियोग
आचार्य चाणक्य के अनुसार कोई भी जो व्यक्ति जो अपनी पत्नी और प्रेमिका से बहुत प्रेम करता है उससे वियोग की स्थिति वह सहन नहीं कर पाता है। यह परिस्थिति उसके लिए बहुत ही कष्टकारी एक तरह से अग्नि में जलने के समान होती है।