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Chanakya niti: मनुष्य के जीवन में आग लगने के समान होती हैं ये परिस्थितियां

Sun, 18 Apr 2021 07:19 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Chanakya Success Mantra - फोटो : social media
आचार्य चाणक्य एक श्रेष्ठ विद्वान थे। वे कूटनीति और राजनीति में बहुत कुशल थे। अपनी कुशलता और बुद्धि के बल पर ही उन्होंने चंद्र गुप्त मोर्य को शासक के रूप में स्थापित होने में मुख्य भूमिका निभाई। वे चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। इन्हें कौटिल्य और विष्णु गुप्त के नाम से भी जाना जाता था। आचार्य चाणक्य एक योग्य शिक्षक भी थे। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और वहीं पर शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को शिक्षा भी प्रदान की। नीतिशास्त्र में छः ऐसी स्थितियों के बारे में बताया गया हैं, जो इंसान को जीते-जी ही आग में जलने के समान होती हैं। जानिए कौन-सी हैं वो 6 स्थितियां…
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में इस श्लोक के माध्यम से बताया है कि वह कौन-सी छः परिस्थितियां हैं जब मनुष्य को जीते जी आग में जलाने के समान महसूस होता है।
 
कांता-वियोग: स्वजनामानो,ऋणस्य शेष: कुनृपस्य सेवा।दरिद्रभावो विषमा सभा च,विनाग्निना ते प्रदहन्ति कायम्।।

पत्नी या प्रेमिका से वियोग
आचार्य चाणक्य के अनुसार कोई भी जो व्यक्ति जो अपनी पत्नी और प्रेमिका से बहुत प्रेम करता है उससे वियोग की स्थिति वह सहन नहीं कर पाता है। यह परिस्थिति उसके लिए बहुत ही कष्टकारी एक तरह से अग्नि में जलने के समान होती है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
अपमान की स्थिति में
जब किसी व्यक्ति का कहीं पर किसी रिश्तेदार, मित्र या अन्य के द्वारा के द्वारा अपमान होने की स्थिति बहुत ही कष्टकारी और असहनीय होती है। अपमानित होने के बाद कोई भी व्यक्ति उसे नहीं भुला पाता है और अपमान की अग्नि में जलता रहता है।

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
अत्यधिक कर्ज होने पर
किसी भी व्यक्ति पर अत्यधिक कर्ज हो जाने पर जब वह उसे चुकाने में असमर्थ रहता है तो उसे हर पल ऐसे ऋण चुकाने की चिंता भीतर ही भीतर असहनीय पीड़ा देती है। चिंता की यह स्थिति मनुष्य के लिए जीत जी अग्नि में जलने के समान होती है।
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चाणक्य नीति - फोटो : social media
कपटी और चरित्रहीन का सेवक होने पर
यदि कोई अच्छा व्यक्ति किसी कपटी और चरित्रहीन राजा या मालिक के सेवक हो तो वह हर पल असहनीय कष्ट महसूस करता है और जब तक वह ऐसे व्यक्ति की सेवा में रहता है, उसे वह परिस्थिति आग के समान कष्ट देती है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
निर्धनता की स्थिति
किसी भी इंसान के लिए निर्धन होना बहुत ही कष्टकारी होता है। धन न होने की स्थिति में व्यक्ति को छोटी सी जरूरत को भी पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, हर पल आर्थिक तंगी की परिस्थिति कारण भीतर ही भीतर जलता रहता है।
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चाणक्य नीति - फोटो : social media
स्वार्थी लोगों के साथ रहने पर
यदि कोई व्यक्ति स्वभाव का अच्छा होकर सदैव दूसरों की सहायता करने के लिए तत्पर रहता हो परंतु उसके आसपास के लोग स्वार्थी स्वभाव के हो तो यह उसके लिए बहुत असहनीय होता है।
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