फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भगवान की पूजा करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त क्यों माना जाता है श्रेष्ठ

Thu, 04 Jun 2020 07:33 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 4
worship
ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना सबसे उपयुक्त रहता है। पूजा पाठ सही तरह और सही समय पर की जाएं तो उचित फल मिलता है और घर में सकारात्मकता बढ़ती है। ऋषि मुनियों ने ब्रह्म मुहूर्त को देवताओं का समय कहा है। हमें प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में जागना चाहिए। इस समय जागने और पूजा पाठ करने से मन को शांति प्राप्त होती है।
विज्ञापन

2 of 4
सूर्योदय होने से पहले जागना चाहिए - फोटो : Social Media
ब्रह्म का अर्थ होता है परम तत्व या परमात्मा इसलिए हमें सूर्योदय होने से पहले जागना चाहिए और पूजा पाठ करना चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त रात्रि का आखिरी प्रहर होता है। सुबह चार बजे से साढ़े पांच बजे तक ब्रह्म मुहूर्त का रहता है। सुबह उठने से हमारा स्वास्थ भी ठीक रहता है क्योंकि सुबह के समय शरीर पर सूर्य की पहली किरणें हमारे लिए बहुत लाभदायक होती हैं। इससे हमारी त्वचा कांतिमय हो जाती है।
विज्ञापन

3 of 4
पूजा - फोटो : सोशल मीडिया
सुबह के समय हमारा मन भी एकाग्र रहता है इस कारण पूजा करते समय हमारा मन ईश्वर के साथ पूर्ण रूप से जुड़ जाता है। और पूजा करते समय मन इधर-उधर भटकता नहीं है। पूजा करते समय पूरा ध्यान पूजा पर ही होना आवश्यक होता है अगर पूजा करते समय हमारा ध्यान भटकता है तो हमें पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है।
विज्ञापन

4 of 4
सूर्योदय - फोटो : अमर उजाला।
क्यों नहीं करनी चाहिए दोपहर के समय पूजा
दोपहर के समय पूजा को वर्जित माना गया है क्योंकि यह समय पितरों की पूजा करने के लिए शुभ माना गया है। दोपहर के समय ईश्वर की पूजा करने से उसका शुभ फल नहीं मिलता है और दिन के समय हमारे मन में कई तरह के विचार चलते हैं जिससे हम अपना पूरा ध्यान पूजा में नहीं लगा पाते हैं। इसलिए सुबह का समय ही पूजा-पाठ के लिए सर्वोत्तम रहता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें