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Swaminarayan Jayanti 2024: कैसे घनश्याम नाम का बालक बन गया भगवान स्वामीनारायण? जिनका दुनियाभर में है मंदिर

Wed, 17 Apr 2024 11:04 AM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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कैसे धनश्याम नाम का बालक बन गया भगवान स्वामीनारायण? - फोटो : Swaminarayan Akshardham
Swaminarayan Jayanti 2024: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान स्वामीनारायण जयंती भी मनाई जाती है। हिंदू धर्मग्रंथों के मुताबिक, श्री स्वामीनारायण का जन्म अयोध्या के पास स्थित छप्पय गांव में 3 अप्रैल 1781 को चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन हुआ था। भगवान स्वामीनारायण का दुनियाभर में मंदिर है। भगवान स्वामीनारायण का नाम घनश्याम था। आइए जानते हैं कि घनश्याम नाम का एक लड़का कैसे भगवान स्वामीनारायण बन गया? 

हिंदू धर्म में कई संप्रदाय हैं, जिनमें स्वामीनारायण संप्रदाय भी बहुत खास है। दरअसल, स्वामीनारायण के अनुयायी वैष्णव संप्रदाय के ही अनुयायी है। इस संप्रदाय के लोग कृष्णावतार को सर्वोच्च भगवान मानते हैं। भगवान स्वामीनारायण ने ही इस संप्रदाय की स्थापना की थी। उन्होंने एक योगी, तपस्वी और श्रीकृष्ण भक्त के रूप में अपना जीवन बिताया। 

स्वामीनारायण को सहजानंद स्वामी के नाम से भी जाना जाता है। उनके पिता श्री हरिप्रसाद व माता भक्तिदेवी थीं। उन्होंने स्वामीनारायण जी का नाम घनश्याम रखा था। कहा जाता है कि भगवान स्वामीनारायण के पैर में कमल का चिन्ह था। इसे देखकर ज्योतिषियों ने बताया कि यह बालक लाखों लोगों के जीवन को सही दिशा देगा। 
 
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कैसे धनश्याम नाम का बालक बन गया भगवान स्वामीनारायण? - फोटो : Swaminarayan Akshardham
कम उम्र में छोड़ दिया था घर

भगवान स्वामीनारायण ने पांच साल की उम्र में अध्ययन शुरू कर दिया था। जह वह आठ साल के थे, तभी उनका जनेऊ संस्कार हो गया। इसके तुरंत बाद उन्होंने शास्त्रों का अध्ययन करना शुरू कर दिया। कहा जाता है कि बेहद कम समय में उन्होंने कई शास्त्रों का अध्ययन कर लिया था। सिर्फ 11 साल की उम्र में इनके माता पिता का देहांत हो गया। इसके कुछ समय बाद वह घर छोड़कर देश भ्रमण पर निकल गए। इस दौरान वह लोगों से मिलते, सत्संग करते और प्रवचन देते। तेजी से उनकी ख्याति फैलने लगी और उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी। 
 
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कैसे धनश्याम नाम का बालक बन गया भगवान स्वामीनारायण? - फोटो : Swaminarayan Akshardham
उन्होंने सात साल तक देशभर का भ्रमण किया। अब स्वामीनारायण को लोग नीलकंठ वर्णी कहने लगे। कुछ समय बाद स्वामी रामानंद ने उनको दीक्षा दी और उनका सहजानंद नाम रख दिया। एक साल बीतने के बाद रामानंद ने सहजानंद को अपने सम्प्रदाय का आचार्य पद भी दे दिया। स्वामी रामानंद के देहांत के बाद सहजानंद गांव-गांव जाकर नारायण मंत्र का जप करने और भजन करने के लिए लोगों को प्रेरणा देने लगे। 
 

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कैसे धनश्याम नाम का बालक बन गया भगवान स्वामीनारायण? - फोटो : Swaminarayan Akshardham
स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना 

बताया जाता है कि जगह-जगह ज्ञान और अध्यात्म की अलख जगाते समय वह गुजरात पहुंचे और यहां उन्होंने स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना की। स्वामीनारायण संप्रदाय और इस संप्रदाय के अनुयायियों के माध्यम से उन्होंने समाज में फैली कई कुरीतियों को दूर करने में अपना योगदान दिया। उन्होंने अलग-अलग प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य भी चलाए। स्वामीनारायण के इस सेवाभाव की वजह से लोग उन्हें भगवान का अवतार मानने लगे। 
 
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कैसे धनश्याम नाम का बालक बन गया भगवान स्वामीनारायण? - फोटो : Swaminarayan Akshardham
भगवान स्वामीनारायण ने अपने शिष्यों को दार्शनिक सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों, अनुष्ठान आदि की शिक्षा दी। मानव जाति और धर्म के लिए सेवाभाव की प्रेरणा देते हुए उन्होंने साल 1830 में अपने प्राण त्याग दिए। स्वामीनारायण संप्रदाय में कई गुरु हुए, जिन्होंने भगवान स्वामीनारायण की आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया। वहीं भगवान स्वामीनारायण के तीसरे आध्यात्मिक उत्तराधिकारी शास्त्री जी महाराज ने 1907 में बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था की स्थापना की, जिसके द्वारा दुनियाभर में कई मंदिर बनाए गए। इस संस्था ने दुनियाभर में 1,200 से ज्यादा हिंदू मंदिर बनाए हैं।
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