कहते हैं मृत्यु के बाद हर किसी की आत्मा को सूक्ष्म शरीर में प्रवेश करके जीवों का न्याय करने वाले यमलोक के पास जाना पड़ता है। यमलोक के बारे में कहा जाता है कि यह बहुत ही डरवाना है। यहां जीवों को तरह-तरह की यातनाएं दी जाती हैं। लेकिन पुराणों में यमलोक की कुछ ऐसी भी बातें हैं जिसे जानकर आपका चेहरा खिल जाएगा।
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यमलोक और यमराज की 10 चौंकाने वाली बातें
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यमराज का ही दूसरा नाम धर्मराज है क्योंकि यह धर्म और कर्म के अनुसार जीवों को अलग-अलग लोकों और योनियों में भेजते हैं। धर्मात्मा व्यक्ति को यह कुछ-कुछ विष्णु भगवान की तरह दर्शन देते हैं और पापियों को उम्र रुप में।
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मृत्यु के बाद परलोक में जीव सबसे पहले यमराज और वरुण को देखता है।
यमलोक और यमराज की 10 चौंकाने वाली बातें
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पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि यमलोक पृथ्वी से 86,000 योजन यानी करीब 12 लाख किलोमीटर दूर है।
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यमलोक में पुष्पोदका नामक एक नदी है जिसका जल शीतल और सुगंधित है। इस नदी में विशाल जांघों वाली अप्सराएं क्रीड़ा करती रहती हैं।
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यमराज की नगरी की लंबाई करीब 48 हजार किलोमीटर और चौराई 24 हजार किलोमीटर है।
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ऋग्वेद में कबूतर और उल्लू को यमराज का दूत बताया गया है। गरुड़ पुराण में कौआ को यम का दूत कहा गया है।
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यमलोक के द्वार पर दो विशाल कुत्ते पहरे देते हैं। इसका उल्लेख हिन्दू धर्मग्रंथों के अलावा पारसी और यूनानी ग्रंथों में भी मिलता है।
यमलोक और यमराज की 10 चौंकाने वाली बातें
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यमलोक में बड़ी-बड़ी अट्टालिकाएं और राजमार्ग हैं। इसका वर्णन गरुड़ पुराण में भी मिलता है। इस लोक में यमराज के सहयाक चित्रगुप्त जी का भी महल है। यमराज का विशाल राजमहल है जो 'कालीत्री' नाम से जाना जाता है। यमराज अपने राजमहल में 'विचार-भू' नाम के सिंहासन पर बैठते हैं।
यमलोक में चार द्वार हैं जिनमें पूर्वी द्वारा से प्रवेश सिर्फ धर्मात्मा और पुण्यात्माओं को मिलता है जबकि दक्षिण द्वार से पापियों का प्रवेश होता है जिसे यमलोक में यातनाएं भुगतनी पड़ती है।