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Jagannath Temple: पुरी के जगन्नाथ मंदिर में क्यों हैं 22 सीढ़ियां? जानें इसका गहरा धार्मिक रहस्य

Thu, 02 Jul 2026 12:54 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Jagannath Temple: जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने से पहले श्रद्धालुओं को इन 22 सीढ़ियों को पार करना होता है। माना जाता है कि इन सीढ़ियों का संबंध केवल निर्माण कला से नहीं, बल्कि आत्मा की आध्यात्मिक प्रगति से भी है। आइए समझते हैं कि आखिर इन सीढ़ियों की संख्या 22 ही क्यों है और इनका क्या आध्यात्मिक महत्व है।
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जगन्नाथ मंदिर की 22 सीढ़ियों का रहस्य - फोटो : AI
Significance Of 22 Steps In Jagannath Temple: ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर हिंदू धर्म के प्रमुख और अत्यंत पवित्र तीर्थों में गिना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के चार धामों में शामिल है और अपनी भव्य वास्तुकला, विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा तथा अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां की हर संरचना और परंपरा अपने भीतर गहन आध्यात्मिक अर्थ समेटे हुए है। इन्हीं में एक विशेष रहस्य मंदिर के मुख्य द्वार तक ले जाने वाली 22 सीढ़ियां हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘बाइसी पहाचा’ कहा जाता है। माना जाता है कि इन सीढ़ियों का संबंध केवल निर्माण कला से नहीं, बल्कि आत्मा की आध्यात्मिक प्रगति से भी है। आइए समझते हैं कि आखिर इन सीढ़ियों की संख्या 22 ही क्यों है और इनका क्या आध्यात्मिक महत्व है।

बाइसी पहाचा का महत्व
मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने से पहले श्रद्धालुओं को इन 22 सीढ़ियों को पार करना होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह चढ़ाई सांसारिक जीवन से आध्यात्मिक चेतना की ओर बढ़ने का प्रतीक मानी जाती है। कहा जाता है कि जो भक्त इन्हें श्रद्धा और नम्रता के साथ पार करता है, उसे भगवान जगन्नाथ के दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
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22 सीढ़ियों से जुड़ी मान्यताएं - फोटो : Adobe Stock
22 सीढ़ियों से जुड़ी मान्यताएं
एक प्रचलित धारणा के अनुसार ये 22 सीढ़ियां मनुष्य के भीतर मौजूद 22 प्रकार के दोषों, कमजोरियों और सांसारिक बंधनों का प्रतीक हैं। जब कोई भक्त इन सीढ़ियों को चढ़ता है, तो वह प्रतीकात्मक रूप से अपने अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह और अन्य विकारों को पीछे छोड़ते हुए भगवान की शरण में प्रवेश करता है।
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आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक - फोटो : Adobe Stock
आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक
कुछ विद्वानों का मानना है कि ये सीढ़ियां आत्मा की प्रगति के 22 चरणों को दर्शाती हैं। उनके अनुसार, ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल शारीरिक यात्रा नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा की शुद्धि से होकर गुजरता है। यही कारण है कि मंदिर में प्रवेश से पहले इन सीढ़ियों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
 

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शास्त्रीय दृष्टिकोण - फोटो : Adobe Stock
शास्त्रीय दृष्टिकोण
कई धार्मिक विचारकों का मत है कि इन 22 सीढ़ियों का संबंध वैदिक सिद्धांतों और आध्यात्मिक तत्वों से भी हो सकता है। कुछ लोग इन्हें मनुष्य की इंद्रियों, पंचमहाभूत, मन, बुद्धि और आत्मा जैसे तत्वों का प्रतीक मानते हैं। हालांकि, विभिन्न परंपराओं में इसकी अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं, इसलिए किसी एक मत को अंतिम नहीं माना जाता।
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आस्था और आध्यात्मिकता का संगम - फोटो : Adobe Stock
आस्था और आध्यात्मिकता का संगम
जगन्नाथ मंदिर की ये 22 सीढ़ियां केवल पत्थरों का ढांचा नहीं हैं, बल्कि वे यह संदेश देती हैं कि ईश्वर तक पहुंचने के लिए बाहरी यात्रा के साथ-साथ भीतर की यात्रा भी उतनी ही जरूरी है। यही वजह है कि सदियों से लाखों श्रद्धालु इन सीढ़ियों को श्रद्धा के साथ पार करते हुए भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते हैं और आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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