परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ,अभिषेक या दर्शन के उपरांत परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए। परिक्रमा शुरु करने के पश्चात बीच में रुकना नहीं चाहिए, साथ ही परिक्रमा वहीं खत्म करें जहां से शुरु की गई थी। ध्यान रखें कि परिक्रमा बीच में रोकने से वह पूर्ण नहीं मानी जाती। परिक्रमा के दौरान मन में निंदा, बुराई, दुर्भावना, क्रोध, तनाव आदि विकार न आने दें। जूते-चप्पल निकाल कर नंगे पैर ही परिक्रमा करें।