फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्यों की जाती है देवमूर्ति की परिक्रमा, क्या मिलता है परिक्रमा करने का फल

विज्ञापन
1 of 6
प्रतिमा के निकट से परिक्रमा करने से दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मंडल से निकलने वाले तेज की हमें सहज ही प्राप्ति हो जाती है।
जब हम मंदिर जाते हैं तो हम भगवान की परिक्रमा जरुर लगाते है। पर क्या कभी आपने सोचा है कि देव मूर्ति की परिक्रमा क्यों लगाई जाती है? वैदिक शास्त्रों के अनुसार जिस स्थान या मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई हो, उस स्थान के मध्य बिंदु से प्रतिमा के कुछ मीटर की दूरी तक लेकर कुछ दूरी तक उस शक्ति की दिव्य प्रभा रहती है ,जो प्रतिमा के निकट में अधिक गहरी और बढ़ती दूरी के हिसाब से कम होती चली जाती है। ऐसे में प्रतिमा के निकट से परिक्रमा करने से दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मंडल से निकलने वाले तेज की हमें सहज ही प्राप्ति हो जाती है।
विज्ञापन

2 of 6
क्या हैं परिक्रमा का नियम-
दैवीय शक्ति के आभामंडल की गति दक्षिणवर्ती होती है,अतः उनकी दिव्य प्रभा सदैव ही दक्षिण की ओर गतिमान होती है। यही कारण है कि दाएं हाथ की ओर से परिक्रमा किया जाना श्रेष्ठ माना गया है। बाएं हाथ की ओर से परिक्रमा करने पर दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मडल की गति और हमारे अंदर विद्यमान दिव्य परमाणुओं में टकराव पैदा होता है, जिससे हमारा तेज नष्ट हो जाता है। हम अपने इष्ट देवी-देवता की मूर्ति की विविध शक्तियों की प्रभा या तेज को परिक्रमा करके प्राप्त कर सकते हैं। उनका यह तेजदान विघ्नों, संकटों, विपत्तियों का नाश करने में समर्थ होता है।
विज्ञापन

3 of 6
परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ,अभिषेक या दर्शन के उपरांत परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए। परिक्रमा शुरु करने के पश्चात बीच में रुकना नहीं चाहिए, साथ ही परिक्रमा वहीं खत्म करें जहां से शुरु की गई थी। ध्यान रखें कि परिक्रमा बीच में रोकने से वह पूर्ण नहीं मानी जाती। परिक्रमा के दौरान मन में निंदा, बुराई, दुर्भावना, क्रोध, तनाव आदि विकार न आने दें। जूते-चप्पल निकाल कर नंगे पैर ही परिक्रमा करें।      

4 of 6
किस देव की कितनी परिक्रमा-
माना जाता है कि प्रतिमा की जितनी अधिक परिक्रमा की जाए, उतना ही अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है। परंतु शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए परिक्रमा की अलग संख्या निर्धारित की गई है।
विज्ञापन

5 of 6
1.  महिलाओं द्वारा वटवृक्ष, पीपल एवं तुलसी की एक या अधिक परिक्रमा करना सौभाग्य प्रदान करता है।

2.  शिवजी की आधी परिक्रमा की जाती है। शिव जी की परिक्रमा करने से नकारात्मक विचार और बुरे स्वप्नों का नाश होता है। ध्यान रहे भगवान शिव की परिक्रमा करते समय जलहरी की धार को न लांघे।

3. दुर्गा मां की एक परिक्रमा कर नवार्ण मंत्र का ध्यान जरूरी है, इससे सँजोए गए संकल्प और लक्ष्य सकारात्मक रूप लेते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
ganesh - फोटो : Social Media
4.  गणेशजी और हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है। गणेश जी की परिक्रमा करने से सोचे हुए कार्य निर्विघ्न पूर्ण होते है एवं गणेशजी के स्वरूप व मंत्र का विधिवत ध्यान करने पर कार्य सिद्ध होने लगते हैं।

5. श्री विष्णुजी एवं उनके सभी अवतारों की चार परिक्रमा करनी चाहिए। विष्णु जी की परिक्रमा करने से हृदय परिपुष्ट और संकल्प ऊर्जावान बनकर सकारात्मक सोच की वृद्धि करते हैं।

6. सूर्य मंदिर की सात परिक्रमा करने से मन पवित्र और आनंद से भर उठता है तथा बुरे और कड़वे विचारों का विनाश होकर श्रेष्ठ विचार पोषित होते हैं। सूर्य को अर्घ्य देकर “ॐ भास्कराय नमः”का जाप कई रोगों का नाशक है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें