पूजा में आसन का महत्व
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पूजा के अनुसार चुनें आसन
हर पूजा का अपना विशेष महत्व है। पूजा के आधार पर भी आसनों का चयन करना चाहिए। आइए जानते हैं किस प्रकार कि पूजा के लिए कैसे आसनों का प्रयोग करना चाहिए।
कुशा का आसन
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार कुशा नामक घास को भगवान के शरीर से उत्पन्न माना जाता है। कहते हैं इस आसन पर बैठकर जो भी साधक आरधन करता है उसे सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। यदि कोई भी साधक मंत्र सिद्धि की प्राप्ति करना चाहता है तो इसके लिए कुशा का आसन इस्तेमाल करना चाहिए।
कंबल का आसन
घरों में पूजा के दौरान कंबल के आसन का प्रयोग करना उत्तम माना जाता है। दुर्गा मां, माता लक्ष्मी, हनुमानजी आदि की पूजा के लिए लाल रंग का कंबल सर्वश्रेष्ठ माना गया हैं ।
मृगचर्म का आसन
मृगचर्म का आसन बह्मचर्य, ज्ञान, वैराग्य, सिद्धि शांति एवं मोक्ष प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ आसन माना जाता है। कहते हैं इस पर बैठकर पूजा करने से इंद्रियां संयमित रहती है।
बाघचर्म का आसन
बाघचर्म का आसन का प्रयोग प्राचीनकाल में सन्यासी, योगी करते थे। भगवान भोलेनाथ की तस्वीरों में भी उन्हें बाघचर्म पर विराजित दिखाया जाता है। मान्यता है कि इस आसन पर पूजा करने से आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति होती हैं ।