पद्म पुराण के अनुसार ब्रह्मा ने अपने मानस पुत्र अत्रि को सृष्टि का विस्तार करने की आज्ञा दी । उनकी आज्ञा पाकर महर्षि अत्रि ने एक तप प्रारंभ किया। तप काल में एक दिन महर्षि की आंखो से जल की कुछ बूंदें गिरी जो काफी प्रकाशमय थी। तब दिशाओं ने स्त्री रूप में आ कर पुत्र प्राप्ति की इच्छा से उन बूंदों को ग्रहण कर लिया। परंतु उन बूंदो को दिशाएं धारण न रख सकी और उन्हें त्याग दिया। उस त्यागे हुए गर्भ को ब्रह्मा ने चंद्रमा के नाम से प्रख्यात किया ।
नहीं बन पा रहा है धन योग? जानिए इसका सही समाधान विश्व-प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से केवल 251 रुपये में। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)