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Neelkantheshwar: शिव जी के इस मंदिर में रात में नहीं जाता कोई, सुबह मिलता है यह चमत्कार

Tue, 29 Jul 2025 01:20 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत सहित अन्य देशों में महादेव के कई मंदिर हैं। इन सभी का अपना विशेष महत्व और मान्यताएं भी हैं। इन्हीं में से एक नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर है, जो मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के उदयपुर गांव में स्थित हैं। माना जाता है कि सुबह मंदिर के पट खुलते ही शिवलिंग पर फूल चढ़ा हुआ मिलता है, ये फूल कहां से आता है और इसका क्या रहस्य है, आइए विस्तार से जानते हैं
 
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Neelkantheshwar - फोटो : अमर उजाला
Neelkantheshwar: भगवान शिव जिन्हें देवों के देव महादेव कहा जाता है। वह त्रिदेवों में से एक है और उनका पूजन कल्याणकारी देवता के रूप में किया जाता है। मान्यता है कि भोलेनाथ को केवल जल चढ़ाने से वह प्रसन्न होते हैं और साधक की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। वर्तमान में सावन माह जारी है और इसी उपलक्ष्य में देशभर के शिव मंदिरों में महाकाल की उपासना का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इन्हीं में से एक नीलकंठेश्वर मंदिर है, जो शंकर जी को समर्पित है। यह मंदिर अपनी बनावट और सुंदरता के लिए जाना जाता है। इसपर बनी आकृतियां सभी को ध्यान आकर्षित करने वाली हैं। इसके अलावा मंदिर के शिखर पर मानव के आकार की एक सुंदर आकृति है, जिसे मंदिर का वास्तुकार माना जाता है। खास बात यह है कि नीलकंठेश्वर मंदिर को रातों रात बनाया गया है। आइए इससे जुड़ा रहस्य विस्तार से जानते हैं...
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Neelkantheshwar - फोटो : freepik
क्या है नीलकंठेश्वर मंदिर से जुड़ी मान्यताएं
नीलकंठेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के उदयपुर गांव में स्थित हैं। यहां सुबह मंदिर के पट खुलते ही शिवलिंग पर फूल चढ़ा हुआ मिलता है। शिवलिंग पर फूल का मिलना आज तक रहस्य बना हुआ है। परंतु स्थानीय लोगों का मानना है कि बुन्देलखण्ड के सेनापति आल्हा और ऊदल महाकाल के अन्यय भक्त थे। इसलिए वह रोजाना रात को यहां आकर फूल रखकर जाते हैं।
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Neelkantheshwar - फोटो : adobe
नीलकंठेश्वर मंदिर में रात को प्रवेश करना पूरी तरह से मना है। कहा जाता है कि भगवान भोलेनाथ के इस भव्य मंदिर को एक ही व्यक्ति द्वारा रातों-रात बनाया गया था। ऐसी मान्यता है कि रात को मंदिर बनाने के बाद जब वह व्यक्ति मंदिर की चोटी से उतरकर नीचे जा रहा था, तब उसका एक झोला ऊपर ही रह गया था। अपने झोले को वापस लेने के लिए वह फिर से मंदिर के शिखर पर चढ़ गया। जब वह नीचे आने लगा तो मुर्गे ने बांग दे दी और वह  व्यक्ति वहीं रह गया।
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Neelkantheshwar - फोटो : freepik
आज भी नीलकंठेश्वर मंदिर के ऊपर उस व्यक्ति का आकार देखा जा सकता है। बता दें, नीलकंठेश्वर मंदिर की दिवारों पर बनी प्रतिमाएं खंडित हैं, जिन्हें बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया गया है। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि मुगलों ने आक्रमण के दौरान इन सभी से छेड़खानी की होगी।


सावन में शिव पूजन का महत्व
हिंदू धर्म में सावन का विशेष महत्व होता है। यह माह भगवान शिव की पूजा-अर्चना को समर्पित है। मान्यता है कि सावन में महाकाल की उपासना करने से साधक के बड़े से बड़े कष्ट दूर होते हैं। यही नहीं कर्ज, तनाव, रोग और कलह से भी मुक्ति मिलती हैं। शास्त्रों में भी इस माह की महिमा का उल्लेख है। यदि सावन में केवल जल से महादेव का जलाभिषेक किया जाए, तो प्रेम जीवन सुखमय और जीवन शांतिपूर्ण बनता है। पौराणिक कथा के मुताबिक सावन माह में ही देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न महादेव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसलिए इस माह को भोलेनाथ की विशेष कृपा और प्रसन्न करने के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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