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Vrishabh Sankranti: वृषभ संक्रांति पर मिलेगा दोगुना पुण्य, इन गलतियों से दूरी बनाकर रखें

Wed, 13 May 2026 11:27 PM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

वृषभ संक्रांति 2026 का पर्व 15 मई को मनाया जाएगा। जानें इस दिन सूर्य उपासना, दान-पुण्य का महत्व और कौन-से कार्य करने से बचना चाहिए, ताकि शुभ फलों की प्राप्ति हो सके।
 
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वृषभ संक्रांति 2026 - फोटो : amar ujala
Vrishabha Sankranti: वृषभ संक्रांति का पर्व इस वर्ष शुक्रवार, 15 मई को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं, जिसका विशेष आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है। यह दिन सूर्य उपासना, पवित्र स्नान, दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए पुण्य कर्मों से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। वहीं, कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए हैं जिन्हें इस दिन भूलकर भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे शुभ फलों में कमी आ सकती है। आइए जानते हैं वृषभ संक्रांति के दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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वृषभ संक्रांति का धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। - फोटो : adobe stock
वृषभ संक्रांति का महत्व 
वृषभ संक्रांति का धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व ज्येष्ठ माह के संक्रमण काल में आता है, जिसे शुभ बदलाव और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान, सूर्य देव की आराधना और जरूरतमंदों को दान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और खुशहाली बनी रहती है। ज्योतिष शास्त्र में वृषभ राशि के स्वामी शुक्र ग्रह को माना गया है, जो भौतिक सुख, वैभव और ऐश्वर्य के कारक हैं। ऐसे में वृषभ संक्रांति के दिन किए गए शुभ कार्य, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान विशेष फलदायी माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्मों से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा यह समय नए निवेश, व्यापार और भविष्य की योजनाओं की शुरुआत के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है।
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वृषभ संक्रांति पर इन गलतियों से बचें - फोटो : adobe stock
वृषभ संक्रांति पर इन गलतियों से बचें 
  • वृषभ संक्रांति के दिन झूठ बोलने, तामसिक भोजन करने, अनावश्यक विवाद करने और देर तक सोने जैसी गलतियों से बचना चाहिए।
  • इस पावन दिन पर सूर्योदय से पहले उठने का प्रयास करें और देर तक सोने से परहेज करें, क्योंकि इससे ऊर्जा में कमी आ सकती है।
  • मांस, मछली, शराब जैसे तामसिक आहार का सेवन न करें और अत्यधिक तीखा या भारी भोजन से भी दूरी बनाए रखें।
  • इस दिन केवल सात्विक भोजन करना ही श्रेष्ठ माना जाता है, जिससे मन और शरीर दोनों शुद्ध रहते हैं।
  • वृषभ संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है, इसलिए जरूरतमंदों को दान देना न भूलें।

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वृषभ संक्रांति पर करें शुभ कार्य - फोटो : adobe stock
वृषभ संक्रांति पर करें शुभ कार्य 
  • वृषभ संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है; अगर यह संभव न हो तो घर पर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें और “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार अन्न और वस्त्र का दान करें, यह पुण्य प्राप्ति का उत्तम साधन माना जाता है।
  • इस दिन गायों की सेवा करना और उन्हें भोजन कराना बहुत ही शुभ फल देने वाला कार्य होता है।
  • संक्रांति के पुण्य काल में जरूरतमंदों या प्यासों को पानी पिलाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • यदि संभव हो तो प्याऊ लगवाना या जल सेवा करना भी इस दिन विशेष पुण्य देता है।
  • मन में शांति, श्रद्धा और सकारात्मक भाव बनाए रखें, यही सच्चे शुभ फल की कुंजी मानी जाती है।
  • किसी भी कार्य को जल्दबाज़ी या दिखावे से नहीं, बल्कि श्रद्धा और सादगी के साथ करें।
  • पूरे दिन आध्यात्मिक सोच और सात्विक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करें।
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वृषभ संक्रांति शुभ मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला
वृषभ संक्रांति शुभ मुहूर्त
वृषभ संक्रांति पुण्य काल - प्रातः  5:30 मिनट से प्रातः 6:28 मिनट तक
वृषभ संक्रांति का क्षण - प्रातः  6:28 मिनट पर



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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