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विवाह पंचमी विशेषः धनुष तोड़ने से पहले ही सीता हो गई थी राम की

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शास्त्रों में भगवान राम के विवाह की जो तिथि मिलती है उसके अनुसार मार्गशीर्ष मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को भगवन राम का विवाह राजा जनक की कन्या सीता से हुआ था। इस तिथि को विवाह पंचमी के नाम से जाना जाता है।
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व‌िवाह पंचमी व‌िशेषः धनुष तोड़ने से पहले ही सीता हो गई थी राम की

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रामचर‌ित मानस में कुछ ऐसी घटनाओं का ज‌िक्र म‌िलता है ज‌िससे पता चलता है क‌ि व‌िवाह से पहले ही देवी सीता ने भगवान राम को अपना पत‌ि मान ल‌िया था।
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व‌िवाह पंचमी व‌िशेषः धनुष तोड़ने से पहले ही सीता हो गई थी राम की

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मानस के अनुसार राम और सीता की पहली भेंट पुष्प वाट‌िका में हुई थी जहां देवी सीता गौरी की पूजा के
ल‌िए आई थी और राम जी पुष्प तोड़ने। यहीं पहली बार राम और सीता ने पहली बार एक दूसरे को देखा था।

व‌िवाह पंचमी व‌िशेषः धनुष तोड़ने से पहले ही सीता हो गई थी राम की

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इस छोटी सी मुलाकात में ही दोनों एक दूसरे को पसंद कर चुके थे। रामचर‌ित मानस के एक दोहे में यह बात स्पष्ट होती है। 'मनु जाहि राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरो। करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो। एही भांति गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषीं अली। तुलसी भावानिः पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली।।
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व‌िवाह पंचमी व‌िशेषः धनुष तोड़ने से पहले ही सीता हो गई थी राम की

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इस दोहे से स्पष्ट होता है क‌ि राम जी के दर्शन पाने के बाद सीता माता गौरी की पूजा करते हुए मन ही मन प्रार्थना करती है क‌ि उन्हें पत‌ि रुप में भगवान राम प्राप्त हों। देवी सीता की इस मनोकामना को समझते हुए गौरी उन्हें आशीर्वाद देती हैं क‌ि भगवान राम ही उन्हें पत‌ि रूप में प्राप्त होंगे। और धनुष भंग करके सीता के राम बन गए।
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