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विदुर नीति: जिस व्यक्ति में होते हैं ये दोष, हर सुख होने के बाद भी रहता है अंदर से दुखी

Sat, 30 Jan 2021 11:42 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Vidur Neeti
हिंदू धर्म में महाभारत एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। विद्वानों के अनुसार महाभारत को पांचवां वेद माना गया है। महाभारत एक ऐसा ग्रंथ है जिसे यदि सही से समझा जाए तो यह जीवन में बड़ी सीख देता है। महाभारत में महात्मा विदुर ने बहुत ही अहम भूमिका निभाई थी। वे कुशाग्र बुद्धि के होने के साथ अत्यंत दूरदर्शी थे। इतने गुणी होने पर भी उनका स्वाभाव अत्यंत सरल और शांत था। विदुर की शिक्षाएं आज के समय में भी मनुष्य के जीवन में बहुत मायने रखती हैं। विदुर नीति में एक श्लोक के द्वारा मनुष्य के स्वभाव से जुड़े छह दोष बताए गए हैं। यदि जिस मनुष्य में ये छह दोष होते हैं वह हर सुख प्राप्त करे के पश्चात भी हर समय अंदर से दुखी रहता है। तो चलिए जानते हैं कि कौन से हैं वे छह दोष...

ईर्ष्या घृणो न संतुष्ट: क्रोधनो नित्यशङ्कित:।
परभाग्योपजीवी च षडेते नित्यदु:खिता:।।

अर्थात, ईर्ष्या, घृणा, क्रोधी, असंतोष, दूसरों पर शक करना, दूसरों पर आश्रित रहने वाला, जिस मनुष्य में ये छह दोष होते हैं वह सुख भोगकर भी सुखी नहीं रहता पाता है।
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Vidur Neeti - फोटो : self
ईर्ष्या करने वाला व्यक्ति
जिस व्यक्ति का स्वाभाव ईर्ष्यालु होता है वह कभी सुखी नहीं रह पाता है। अपने इस दोष के कारण वह सदैव दूसरों के सुख को देखकर मन ही मन में ईर्ष्या करता रहता है, जिसके कारण वह जीवन में मिलने वाले सुखों को भी सही प्रकार से नहीं भोगता है और हमेशा दूसरों को देखकर दुखी होता रहता है। यदि सही मायनों में सुख की प्राप्ति करनी हो तो कभी भी दूसरों के प्रति अपने मन में ईर्ष्या की भावना नहीं लानी चाहिए।
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vidur - फोटो : Social Media
घृणा भाव रखने वाला
जो लोग अपने मन में घृणा का भाव रखते हैं, वे हमेशा दुखी रहते हैं। घृणा का भाव होने के कारण ऐसे व्यक्ति दूसरों से संबंध नहीं रखते हैं, जिसके कारण अकेले रह जाते हैं और हमेशा दुखी होते रहते हैं।

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VIDHURA - फोटो : SELF
क्रोधी व्यक्ति
अत्यधिक क्रोध करने वाला व्यक्ति भी हमेशा दुखी ही रहता है। जो लोग जरा सी बात पर क्रोध करने लगते हैं, वे गलत-सही की पहचान नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण वे अपना ही अहित कर बैठते हैं या क्रोध में आकर दूसरों को ऐसा दुख पहुंचा देते हैं जिसके लिए बाद में पछतावे के कारण दुखी होते रहते हैं।
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vidur - फोटो : self
असंतुष्ट व्यक्ति
संतुष्टता की भावना ही व्यक्ति को अंदर से सुख प्रदान करती है, लेकिन कुछ लोगों का स्वाभाव होता है कि चाहे कितना भी आनंद हो परंतु उनके मन में अंसतोष हमेशा की भावना बनी रहती है। इसी असंतुष्टता के कारण वे दूसरों की खुशी को देखकर दुखी होने लगते हैं, क्योंकि असंतुष्टता से ही ईर्ष्या की भावना का जन्म होने लगता है।
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vidur niti - फोटो : pinterest
शक करने वाला व्यक्ति
शक करने वाले स्वभाव का व्यक्ति कभी भी खुश नहीं रहता पाता है। ऐसे लोग किसी पर विश्वास नहीं कर पाते हैं और बिना किसी ठोस वजह से ही किसी पर भी शक करने लगते हैं। इसी स्वाभाव के चलते लोग अपने रश्तों में भी दरार डाल लेते हैं, जिसके कारण वे हमेशा दुखी रहते हैं।
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vidur niti - फोटो : Social Media
हर समय दूसरों पर आश्रित रहने वाला
कुछ लोग किसी कारणवश मजबूरी के चलते भी दूसरों पर आश्रित रहते हैं परंतु कुछ लोग स्वाभाववश दूसरों पर आश्रित रहने लगते हैं। अपने इसी स्वाभाव के कारण ऐसे लोग आलोचना और हंसी का पात्र बनते हैं। जिसके कारण वे हमेशा दुखी रहते हैं।
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