हिंदू धर्म में महाभारत एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। विद्वानों के अनुसार महाभारत को पांचवां वेद माना गया है। महाभारत एक ऐसा ग्रंथ है जिसे यदि सही से समझा जाए तो यह जीवन में बड़ी सीख देता है। महाभारत में महात्मा विदुर ने बहुत ही अहम भूमिका निभाई थी। वे कुशाग्र बुद्धि के होने के साथ अत्यंत दूरदर्शी थे। इतने गुणी होने पर भी उनका स्वाभाव अत्यंत सरल और शांत था। विदुर की शिक्षाएं आज के समय में भी मनुष्य के जीवन में बहुत मायने रखती हैं। विदुर नीति में एक श्लोक के द्वारा मनुष्य के स्वभाव से जुड़े छह दोष बताए गए हैं। यदि जिस मनुष्य में ये छह दोष होते हैं वह हर सुख प्राप्त करे के पश्चात भी हर समय अंदर से दुखी रहता है। तो चलिए जानते हैं कि कौन से हैं वे छह दोष...
ईर्ष्या घृणो न संतुष्ट: क्रोधनो नित्यशङ्कित:।
परभाग्योपजीवी च षडेते नित्यदु:खिता:।।
अर्थात, ईर्ष्या, घृणा, क्रोधी, असंतोष, दूसरों पर शक करना, दूसरों पर आश्रित रहने वाला, जिस मनुष्य में ये छह दोष होते हैं वह सुख भोगकर भी सुखी नहीं रहता पाता है।