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Vat Savitri Vrat 2022: कब है वट सावित्री व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Fri, 13 May 2022 02:55 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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कब है वट सावित्री व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व - फोटो : amar ujala
Vat Savitri Vrat 2022 Date: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि के दिन वट सावित्री का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करके सौभाग्यवती महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं में वट सावित्री के व्रत का महत्व करवा चौथ जितना ही बताया गया है। इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती हैं। पति के सुखमय जीवन और दीर्घायु के लिए वट वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करती हैं और वृक्ष के चारों और परिक्रमा करती हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से पति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि के साथ लंबी आयु की प्राप्ति होती है। हर साल ये व्रत ज्येष्ठ अमावस्या तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल ये व्रत 30 मई 2022, दिन सोमवार को रखा जाएगा। ऐसे में चलिए जानते हैं सावित्री व्रत तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व के बारे में... 
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कब है वट सावित्री व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व - फोटो : amar ujala
वट सावित्री व्रत का मुहूर्त
  • ज्येष्ठ अमावस्या तिथि प्रारंभ: 29 मई, 2022 दोपहर 02 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर,
  • अमावस्या तिथि का समापन: 30 मई, 2022 को शाम 04 बजकर 59 मिनट पर होगा।   
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कब है वट सावित्री व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व - फोटो : amar ujala
वट पूर्णिमा व्रत विधि
वट सावित्री व्रत वाले दिन सुहागिन महिलाएं प्रात: जल्दी उठें और स्नान करें। स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। शृंगार जरूर करें। साथ ही इस दिन पीला सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। 

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कब है वट सावित्री व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व - फोटो : amar ujala
इस दिन बरगद के पेड़ के नीचे सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें। बरगद के पेड़ में जल डालकर उसमें पुष्प, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं। सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें। बरगद के वृक्ष में जल चढ़ाएं। वृक्ष में रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद मांगें। 
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कब है वट सावित्री व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व - फोटो : अमर उजाला
वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें। इसके बाद हाथ में काले चना लेकर इस व्रत का कथा सुनें। कथा सुनने के बाद पंडित जी को दान देना न भूलें। दान में आप वस्त्र, पैसे और चने दें। अगले दिन व्रत को तोड़ने से पहले बरगद के वृक्ष का कोपल खाकर उपवास समाप्त करें। 
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कब है वट सावित्री व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व - फोटो : अमर उजाला
वट सावित्री व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर लिया था। कहा जाता है कि इसी दिन सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले आई थीं। इस व्रत में महिलाएं सावित्री के समान अपने पति की दीर्घायु की कामना तीनों देवताओं से करती हैं, ताकि उनके पति को सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त हो सके।
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