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Varuthini Ekadashi 2026: वैशाख मास की पहली एकादशी कब? इन चीजों का जरूर करें दान

Fri, 03 Apr 2026 06:27 PM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Varuthini Ekadashi 2026: अप्रैल में हनुमान जयंती से अक्षय तृतीया तक कई पर्व आते हैं। इस माह की पहली एकादशी वरूथिनी एकादशी कहलाती है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होती है। मान्यता है कि इस व्रत से पापों से मुक्ति मिलती है। हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए होती है। इस दिन अन्न, वस्त्र, जल आदि का दान करना शुभ माना जाता है।
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वैशाख माह में कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जानते हैं। - फोटो : अमर उजाल
अप्रैल माह में हनुमान जयंती से लेकर अक्षय तृतीया तक कई पर्व मनाए जाएंगे। हर महीने की तरह इस महीने भी 2 एकादशी पड़ेंगी। यहां हम इस माह की पहली एकादशी के बारे में बात कर रहे हैं । इस माह की पहली एकादशी को  हम वरूथिनी एकादशी के नाम से जानते हैं। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों में पड़ने वाली एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। आइए जानते हैं कि इस माह कि पहली एकादशी की सही तिथि क्या है और कौन सी चीज़ों का दान देना शुभ माना जाता है। 
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वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा। - फोटो : amar ujala
वरुथिनी एकादशी: तिथि और शुभ मुहूर्त
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ:   13 अप्रैल, देर रात्रि 1:16 बजे 
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 14 अप्रैल, देर रात्रि 1: 08 बजे 
इसलिए वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा। 
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इस वर्ष वरुथिनी एकादशी पर दो शुभ योग बन रहे हैं। - फोटो : amarujala
शुभ योग में वरूथिनी एकादशी 
इस वर्ष वरुथिनी एकादशी पर दो शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन शुभ योग प्रातःकाल से लेकर शाम 5:17 बजे तक रहेगा, इसके बाद शुक्ल योग प्रारंभ हो जाएगा। इसके साथ ही, वरुथिनी एकादशी पर धनिष्ठा नक्षत्र प्रातःकाल से शाम 4:03 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शतभिषा नक्षत्र लग जाएगा।
 

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पहला मुहूर्त अमृत-सर्वोत्तम और दूसरा शुभ-उत्तम माना गया है। - फोटो : amarujala
वरूथिनी एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त 

पहला मुहूर्त:  प्रातः 5:58 बजे से 7:34 बजे तक
दूसरा मुहूर्त: प्रातः 9:10 बजे से 10:46 बजे तक
इसमें पहला मुहूर्त अमृत-सर्वोत्तम और दूसरा शुभ-उत्तम माना गया है।

स्नान का मुहूर्त 
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:28 बजे से 5:13 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त
प्रातः 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक होगा।

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पारण 14 अप्रैल को किया जाएगा।
व्रत पारण का समय
यदि आप 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का व्रत रखते हैं तो इसका पारण 14 अप्रैल को किया जाएगा। पारण का समय सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा। पारण के दिन हरि वासर का समापन सुबह 6:54 बजे होगा, जिसके बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है।

 

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इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्ति पा सकता है। - फोटो : freepik
वरूथिनी एकादशी का महत्व 
वरुथिनी एकादशी के दिन पूजा-अर्चना करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पुराणों के अनुसार इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्ति पा सकता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से न केवल इस जन्म में बल्कि आने वाले जन्मों में भी सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा मान्धाता और धुंधुमार ने इसी व्रत का पालन कर मोक्ष प्राप्त किया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान शिव को भी एक श्राप से मुक्ति तब मिली, जब उन्होंने वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा। इस दिन व्रत रखने से आत्मा, शरीर और मन की शुद्धि होती है। यह व्रत शरीर को विषमुक्त करने में सहायक माना जाता है और व्यक्ति को ईश्वर से जुड़कर आंतरिक शांति का अनुभव होता है।
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अन्न का दान करने से जीवन में अन्न की कमी नहीं होती और मां अन्नपूर्णा की कृपा मिलती है। - फोटो : freepik.com
वरूथिनी एकादशी पर करें इन चीजों का दान 
  • एकादशी के दिन तुलसी के पौधे का दान करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और धन लाभ के योग बनते हैं।
  • मां लक्ष्मी को सोलह श्रृंगार की चीजें अर्पित करके उन्हें सुहागिन महिलाओं में दान करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल और पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत होते हैं।
  • गरीबों या मंदिर में हल्दी का दान करने से ग्रह दोष कम होता है और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
  • अन्न का दान करने से जीवन में अन्न की कमी नहीं होती और मां अन्नपूर्णा की कृपा मिलती है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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