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Valmiki Jayanti 2020: कब मनाई जाएगी इस बार वाल्मिकी जयंती और महत्व

Wed, 21 Oct 2020 03:02 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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वाल्मीकि जयंती 2020 - फोटो : pinterst
महर्षि वाल्मिकी जयंती अश्विन मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है, इस बार वाल्मिकी जयंती 31 अक्तूबर को पड़ रही है। वाल्मिकी जयंती रामायण महाकाव्य को रचियता महर्षि वाल्मिकी के जन्म दिवस के रुप मे मनाया जाता है। रामायण महाकाव्य लगभग 21 भाषाओं में उपलब्ध है। महर्षि वाल्मिकी के द्वारा संस्कृत भाषा लिखी गई रामायण को सबसे प्राचीन माना जाता है। संस्कृत के प्रथम महाकाव्य की रचना करने के कारण इन्हें "आदिकवि" भी कहा जाता है। वाल्मिकी जयंती पर लोग बहुत धूमधाम के साथ महर्षि वाल्मिकी की गद्दी निकालते हैं। वाल्मिकी मंदिरो में इनको श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। महर्षि वाल्मिकी की लिखी गई रामायण पूरे विश्व में विख्यात है।
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वाल्मीकि जयंती 2020 - फोटो : pinterst
महर्षि वाल्मिकी के जन्म के बारे में कोई स्पष्ट प्रमाण तो नहीं मिलता है लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार महर्षि वाल्मिकी का जन्म महर्षि कश्यप और अदिति के नौवें पुत्र वरुण और उनकी पत्नी चर्षणी के यहां माना जाता है। भृगु ऋषि इनके बड़े भाई थे। महर्षि वाल्मिकी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। प्रथम श्लोक की रचन भी इन्होंने ही की थी।

 
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वाल्मीकि जयंती 2020
वाल्मिकी के द्वारा लिखी गई रामायण आज भी सनातन धर्म मानने वालों के लिए पूजनीय है। महर्षि वाल्मिकी के नाम के विषय में भी कहा जाता है कि एक बार महर्षि वाल्मिकी ध्यान में मग्न थे। तब उनके पूरे शरीर को दीमको ने घर लिया था। जब महर्षि की साधना पूर्ण होने के बाद उनका ध्यान टूटा तो वे दीमक को हटा कर बाहर निकले। दीमको के घर को वाल्मिकी कह जाता है। इसी के कारण उनका नाम  वाल्मिकी हुआ।
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वाल्मीकि जयंती 2020
जब भगवान राम ने माता सीता को त्याग दिया था। तब माता सीता महर्षि वाल्मिकी का आश्रम में ही रहती थी। यहीं पर उन्होंने लव और कुश को  जन्म दिया था। यहां पर माता सीता वनदेवी के नाम से निवास करती थी। इसी वजह से वाल्मिकी द्वारा लिखी गई रामायण में लव कुश के जन्म के बाद का वृतांत भी मिलता है। महर्षि वाल्मिकी के द्वारा ही लव कुश को ज्ञान भी दिया गया।
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