Valentine Day Impact On Indian Culture: भारतीय संस्कृति त्याग, संयम और साधना की विरासत को बताने वाली महान संस्कृति है। यहां प्रत्येक पर्व और उत्सव के पीछे एक गहन आध्यात्मिक शास्त्र निहित है। दुर्भाग्यवश, आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्यों के अंधानुकरण के कारण वैलेंटाइन डे जैसी अवधारणाओं के जाल में फंसती जा रही है। यह केवल एक दिन नहीं है, अपितु भारतीय परिवार व्यवस्था पर, नैतिक मूल्यों पर तथा हिंदू धर्म पर हो रहा एक वैचारिक और सांस्कृतिक आक्रमण है।
देहबुद्धि का परिष्करण या आत्मबुद्धि का जागरण ?
पाश्चात्यों की वैलेंटाइन डे की अवधारणा पूर्णत देहबुद्धि पर आधारित है। इसमें केवल शारीरिक आकर्षण और इंद्रियसुख को अस्वाभाविक महत्व दिया जाता है। जिसे आज की पीढ़ी प्रेम कहती है, वह वास्तव में क्षण भंगुर वासना है। इसके विपरीत, भारतीय संस्कृति आत्मबुद्धि सिखाती है। हिंदू धर्म ने प्रीति का उपदेश दिया है। प्रीति अर्थात् निरपेक्ष प्रेम! जो शरीर को देखकर नहीं, अपितु सामने वाले व्यक्ति में स्थित ईश्वर (आत्मतत्त्व) को देखकर किया जाता है, वही शाश्वत होता है। वैलेंटाइन डे केवल पाश्चात्य रोमांस का परिष्करण करता है, जबकि हिंदू धर्म संयम के माध्यम से ब्रह्मानंद की ओर ले जाता है।