हिन्दू धर्म में एकादशी का व्रत रखने की परंपरा है। साल में कुल 24 एकादशियां आती हैं और इनमें से पहली एकादशी मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष को आती है। इस बार यह एकादशी 14 नवंबर को है जिसे उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष के दिन एकादशी देवी प्रगट हुई थी जिसके कारण इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा।
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उत्पन्ना एकादशी के व्रत की तैयारी दशमी तिथि को ही आरंभ हो जाती है। इस दिन प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले व्रत का संकल्प करें और भगवान का पूजन करें, व्रत कथा सुनें।
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शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति इस एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के संग एकादशी देवी की पूजा करता है उसके कई जन्मों के पाप कट जाते हैं और व्यक्ति उत्तम लोक में स्थान पाने का अधिकारी बन जाता है।
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शास्त्रों के अनुसार,जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखता वह मोहमाया के प्रभाव से मुक्त हो जाता है, छल-कपट की भावना उसमें कम हो जाती है और अपने पुण्य के प्रभाव से व्यक्ति विष्णु लोक में स्थान पाने योग्य बन जाता है।
एकादशी व्रत तिथि – 14 नवंबर 2017
पारण का समय – 06:47 से 08:54 बजे तक (15 नवंबर 2017)
एकादशी तिथि प्रारंभ – 12:25 बजे से (13 नवंबर 2017)
एकादशी तिथि समाप्त – 12:35 बजे (14 नवंबर 2017)