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Trishul-Damru Vastu: सावन में त्रिशूल और डमरू रखने का क्या है सही तरीका? जानें ये जरूरी वास्तु नियम

Mon, 10 Aug 2026 12:51 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

सावन में घर पर त्रिशूल और डमरू रखना भगवान शिव की कृपा से जोड़कर देखा जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इन्हें सही दिशा और स्थान पर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। जानें त्रिशूल-डमरू रखने की सही दिशा और जरूरी नियम।

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Trishul And Damru Vastu - फोटो : amar ujala

Trishul And Damru Vastu: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान भोलेनाथ से जुड़ी वस्तुओं की पूजा और उन्हें घर में स्थापित करना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। इन्हीं में त्रिशूल और डमरू का विशेष महत्व है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर में त्रिशूल और डमरू को सही दिशा और उचित स्थान पर रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की मान्यता है। कहा जाता है कि त्रिशूल नकारात्मकता से रक्षा का प्रतीक है, जबकि डमरू को शुभ ऊर्जा और आध्यात्मिक जागरण से जोड़ा जाता है। हालांकि, इन्हें घर में रखने से पहले दिशा, स्थान और साफ-सफाई से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं घर में त्रिशूल और डमरू रखने की सही दिशा, स्थान, नियम और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके फायदे।

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Trishul And Damru Vastu - फोटो : adobe stock

त्रिशूल और डमरू किस दिशा में रखें?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, त्रिशूल और डमरू रखने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को शुभ माना जाता है। वास्तु और धार्मिक परंपरा में इस दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। यदि ईशान कोण में इन्हें रखना संभव न हो, तो पूर्व दिशा का विकल्प चुना जा सकता है। मान्यता है कि सही दिशा में त्रिशूल और डमरू रखने से घर के वातावरण में सकारात्मकता बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा कम होने में मदद मिलती है।

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Trishul And Damru Vastu - फोटो : adobe stock

घर में त्रिशूल और डमरू कहां रखें?
दिशा के साथ इनके स्थान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा घर में भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग के पास त्रिशूल और डमरू रखना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, त्रिशूल या डमरू का छोटा प्रतीक, चित्र अथवा यंत्र मुख्य द्वार के ऊपर भी लगाया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं में मुख्य द्वार को घर में ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। इसलिए यहां शिव से जुड़े शुभ प्रतीक लगाने को नकारात्मकता से बचाव से जोड़कर देखा जाता है।

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Trishul And Damru Vastu - फोटो : adobe stock

त्रिशूल और डमरू रखने के जरूरी नियम

  • जिस स्थान पर त्रिशूल और डमरू रखा जाए, वहां साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। इन्हें धूल या गंदगी वाली जगह पर रखने से बचना चाहिए।
  • पूजा स्थल की नियमित सफाई करें। धार्मिक आस्था रखने वाले लोग पवित्र जल का छिड़काव भी कर सकते हैं।
  • पूजा के समय त्रिशूल पर तिलक लगाकर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जा सकती है।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के दौरान डमरू बजाना शुभ माना जाता है। हालांकि, इसे श्रद्धा और उचित तरीके से ही करना चाहिए।
  • त्रिशूल खरीदते समय उसकी धातु का भी ध्यान रखने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार तांबे या चांदी का त्रिशूल घर में रखने के लिए शुभ माना जाता है।
  • त्रिशूल को हमेशा सम्मानजनक और स्वच्छ स्थान पर रखें।

 

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Trishul And Damru Vastu - फोटो : adobe stock
घर में त्रिशूल और डमरू रखने से क्या लाभ होते हैं?
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में सही दिशा और स्थान पर त्रिशूल व डमरू रखने से वातावरण में सकारात्मकता बनी रहने की मान्यता है। इसे नकारात्मक ऊर्जा से बचाव और घर की ऊर्जा को संतुलित रखने का प्रतीक माना जाता है। कुछ मान्यताओं में त्रिशूल को सुरक्षा और शक्ति का प्रतीक बताया गया है, जबकि डमरू की ध्वनि को आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि सावन के महीने में शिव भक्त घर में इन दोनों प्रतीकों को स्थापित करना शुभ मानते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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