फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Tripindi Shradh: क्या होता है त्रिपिंडी श्राद्ध? जानें कब, कैसे और किन्हें कराना चाहिए ये श्राद्ध

Thu, 11 Sep 2025 07:04 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Tripindi Shraddh Vidhi: पितृ पक्ष में त्रिपिंडी श्राद्ध करने का समय बहुत ही शुभ माना जाता है और इस अवधि में किसी भी दिन इसे कराया जा सकता है। इस श्राद्ध में विशेष नियमों का पालन किया जाता है और इसमें कुछ निश्चित सामग्री और अनुष्ठान शामिल होते हैं।
विज्ञापन
1 of 8
त्रिपिंडी श्राद्ध - फोटो : अमर उजाला
What is Tripindi Shraddh: शास्त्रों में त्रिपिंडी श्राद्ध को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है, जो खासकर पितृ पक्ष के दौरान किया जाता है। इसे तीन पीढ़ियों तक के पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है। माना जाता है कि यदि घर में किसी की अकाल मृत्यु हुई हो तो त्रिपिंडी श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार यह श्राद्ध करना चाहिए ताकि परिवार में सुख-शांति बनी रहे।
Jitiya Vrat 2025: कब है जितिया व्रत का नहाय खाय? जाने व्रत की तिथि, नियम और पारण समय
पितृ पक्ष में त्रिपिंडी श्राद्ध करने का समय बहुत ही शुभ माना जाता है और इस अवधि में किसी भी दिन इसे कराया जा सकता है। इस श्राद्ध में विशेष नियमों का पालन किया जाता है और इसमें कुछ निश्चित सामग्री और अनुष्ठान शामिल होते हैं। आगे जानेंगे कि त्रिपिंडी श्राद्ध क्या होता है, इसे करने के क्या-क्या नियम हैं और इस श्राद्ध पर कितना खर्चा आता है।
Surya Grahan 2025: शारदीय नवरात्रि से एक दिन पहले सूर्य ग्रहण, जानें इसका समय और प्रभाव
विज्ञापन

2 of 8
स श्राद्ध से तीन पीढ़ियों तक के पितरों को शांति मिलती है और पितृ दोष दूर होता है। - फोटो : Amar Ujala
त्रिपिंडी श्राद्ध क्या है?
त्रिपिंडी श्राद्ध एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान है जो उन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है जिनका सामान्य श्राद्ध ठीक से नहीं हो पाया या जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो। माना जाता है कि इस श्राद्ध से तीन पीढ़ियों तक के पितरों को शांति मिलती है और पितृ दोष दूर होता है। हर व्यक्ति के लिए अपने जीवन में कम से कम एक बार इसे कराना शुभ माना जाता है।
विज्ञापन

3 of 8
पितृ पक्ष की अष्टमी, एकादशी, चतुर्दशी और अमावस्या के दौरान कभी भी किया जा सकता है - फोटो : Amar Ujala
पितृ पक्ष में त्रिपिंडी श्राद्ध कब करें?
त्रिपिंडी श्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान कभी भी किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए विशेष तिथियाँ अधिक शुभ मानी जाती हैं। इनमें पितृ पक्ष की अष्टमी, एकादशी, चतुर्दशी और अमावस्या शामिल हैं। इस दौरान श्राद्ध कराने से पूर्वजों की आत्मा को अधिक शांति और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

4 of 8
shradh - फोटो : freepik
त्रिपिंडी श्राद्ध की सामग्री

त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए कई पवित्र सामग्री की जरूरत होती है। 
  • जौ और चावल के बने पिंड
  • काला तिल
  • गंगाजल
  • गाय का दूध
  • पंचमेवा और मिठाई
  • कपूर, अगरबत्ती, घंटा, शंख
  • ताम्र के कलश
  • हल्दी, सिंदूर, गुलाल, नारियल
  • सुपारी, फूल, पान के पत्ते आदि।
विज्ञापन

5 of 8
इस श्राद्ध के कारण व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है - फोटो : Amar Ujala
त्रिपिंडी श्राद्ध के फायदे
त्रिपिंडी श्राद्ध करने से तीन पीढ़ियों तक के पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही यह पितृ दोष के नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है। इस श्राद्ध के कारण व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
विज्ञापन

6 of 8
इसमें भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव की पूजा की जाती है। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
त्रिपिंडी श्राद्ध की विधि
इस श्राद्ध को किसी अनुभवी और जानकार पंडित के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। इसमें भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव की पूजा की जाती है। ब्रह्मा को जौ की गांठ दिखाई जाती है, विष्णु से सभी दुःखों की मुक्ति के लिए प्रार्थना होती है, और शिव की आराधना क्रोध के कष्टों से छुटकारा दिलाने के लिए की जाती है।
विज्ञापन

7 of 8
पुरुष सफेद कुर्ता धोती और महिलाएं सफेद या हल्के रंग की साड़ी पहनती हैं। - फोटो : amar ujala
त्रिपिंडी श्राद्ध कौन कर सकता है?
त्रिपिंडी श्राद्ध विवाहित और अविवाहित दोनों कर सकते हैं, लेकिन अकेली स्त्री इसे नहीं कर सकती। इस दौरान पुरुष सफेद कुर्ता धोती और महिलाएं सफेद या हल्के रंग की साड़ी पहनती हैं। काले वस्त्र पहनना वर्जित है।
विज्ञापन

8 of 8
आप इसे त्र्यंबकेश्वर, गोकर्ण, महाबलेश्वर, गरुडेश्वर, हरिहरेश्वर या काशी जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों पर करवा सकते हैं। - फोटो : amar ujala
त्रिपिंडी श्राद्ध कहां करना चाहिए?
त्रिपिंडी श्राद्ध को विशेष धार्मिक और पवित्र स्थानों पर करना शुभ माना जाता है। आप इसे त्र्यंबकेश्वर, गोकर्ण, महाबलेश्वर, गरुडेश्वर, हरिहरेश्वर या काशी जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों पर करवा सकते हैं। ये जगहें पितृ कर्मों के लिए बहुत प्रसिद्ध और प्रभावशाली मानी जाती हैं, जहां श्राद्ध का फल अधिक मिलता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें