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प्रभु श्रीराम से जुड़े वो दस रहस्य, जिन्हें शायद ही जानते होंगे आप

Wed, 05 Aug 2020 06:35 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
जन्मभूमि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनने जा रहा है। अगले महीने की 5 तारीख को मंदिर का भूमि पूजन होगा। भगवान श्रीराम हिन्दुओं की आस्था के महान प्रतीक हैं। आइए जानते हैं उनसे जुड़े ऐसे दस रहस्य जिनसे शायद ही आप रूबरू होंगे।  
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राम सीता विवाह - फोटो : सोशल मीडिया
क्या श्रीराम ने किया था माता सीता का परित्याग?
उत्तर रामायण (उत्तरकांड) में ये वर्णन मिलता है कि भगवान राम ने माता सीता का परित्याग कर दिया था। कहते हैं रामायण का उत्तरकांड बौद्धकाल में जोड़ा गया है। क्योंकि मूल रामायण में उत्तरकांड का जिक्र नहीं मिलता है। शहर-शहर होने वाली रामलीला में भी लंका विजय के बाद रामायण समाप्त हो जाती है। रामकथा पर सबसे प्रामाणिक शोध करने वाले फादर कामिल बुल्के का स्पष्ट मत है कि 'वाल्मीकि रामायण का 'उत्तरकांड' मूल रामायण के बहुत बाद में जोड़ा गया है।
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राम सीता वन प्रस्थान - फोटो : सोशल मीडिया
ये था भगवान श्रीराम का वंश
हिंदू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध। श्रीराम का जन्म इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था। जैन धर्म के तीर्थंकर निमि भी इसी कुल के थे।

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भगवान राम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
श्रीराम राजा थे या भगवान
हमारे शास्त्रों में लिखा है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भगवान विष्णु के अवतार थे। हालांकि उन्होंने अयोध्या में राजा दशरथ के यहां एक आम इंसान के रूप में ही जन्म लिया था। लेकिन व्यक्ति अपने कर्मों से महान बनता है और उनकी महानता उनके उच्च आदर्श, वचनबद्धता और कर्तव्यनिष्ठा है। इसलिए वे हिन्दू आस्था के बड़े केन्द्र हैं जिन्हें भगवान के रूप में पूजा जाता है।
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राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
श्रीराम की बड़ी बहन थी शांता
लोक कथा के अनुसार, शांता राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थी। लेकिन माता कौशल्या ने उसे अपनी बहन वर्षिणी को गोद दे दिया था, जिसकी कोई संतान न थी। बाद में राजा रोमपाद ने श्रंगी ऋषि से उनका विवाह हुआ। कर्नाटक के श्रंगेरी में श्रंगी ऋषि के नाम पर ही श्रंगेरी शहर का नाम रखा गया है। 
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रामायण - फोटो : सोशल मीडिया
श्रीराम ने अपने प्राण से प्रिय भाई लक्ष्मण को दिया मृत्युदंड
संपूर्ण रामायण का सार मर्यादा में रहकर वचन और कर्तव्यों का पालन करना है। इसके मुख्य किरदार भी भगवान श्रीराम हैं। कहते हैं भगवान श्रीराम ने अपने वचन का पालन करते हुए अपने प्राण से प्रिय भाई लक्ष्मण को मृत्युदंड का आदेश दे दिया था।
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रामायण - फोटो : सोशल मीडिया
इस कारण कैकयी ने मांगा था श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास
कैकेयी राजा अश्वपति की बेटी थी और श्रवण कुमार के पिता रत्नऋषि राजा अश्वपति के राजपुरोहित थे और रत्नऋषि ने ही कैकेयी को सभी शास्त्र वेद पुराण की शिक्षा दी थी। उन्होंने कैकेयी को बताया कि राजा दशरथ की कोई संतान राज गद्दी पर नहीं बैठ पायेगी और साथ ही ज्योतिष गणना के आधार पर बताया कि दशरथ की मृत्यु के पश्चात यदि चौदह वर्ष के दौरान कोई संतान गद्दी पर बैठ भी गया तो रघुवंश का नाश हो जाएगा। 

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रामायण धारावाहिक का एक दृश्य - फोटो : DDIndiaLive
माता सीता को लेकर लक्ष्मण ने कही थी ये बात
माता सीता का अपहरण होने के बाद सीता को खोजते-खोजते दोनों भाई को जंगल में माता सीता के कुछ आभूषण मिले। राम ने उन आभूषणों में से कर्णफूल को दिखाकर लक्ष्मण से पूछा कि यह तो सीता के कर्णफूल हैं लेकिन यह घने वन में कैसे आए। इस पर लक्ष्मण ने कहा कि हे भाईया राम! कर्णफूल भाभी के ही हैं यह मैं कैसे बता सकता हूं, मैंने तो कभी भाभी के मुख की ओर देखा ही नहीं। मैं तो सेवक और पुत्र भाव से सदा भाभी के चरणों को देखा है इसलिए मैं सिर्फ उनकी पायल को पहचानता हूं। 

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भगवान हनुमान - फोटो : Pixabay
ऐसे मिले थे प्रभु राम और भक्त हनुमान
हनुमान जी ब्राह्मण का रूप धारण कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण के पास पहुंचे। जब उन्होंने प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को देखा तो वे उनके तेज से बेहद प्रभावित हो गए। वे समझ गए थे कि ये दोनों वीर कोई आमजन नहीं, बल्कि साक्षात किसी देवता के रूप हैं। हनुमान जी अपने आराध्य देव को पहचान गए और उन्होंने अपने नाथ के चरणों में गिरकर उन्हें दंडवत प्रणाम किया। 

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राम सीता - फोटो : सोशल मीडिया
इस कारण श्रीराम को सहना पड़ा माता सीता का वियोग
भगवान श्रीराम को माता सीता का वियोग सहना पड़ा था। लेकिन यह वियोग उन्हें एक श्राप के कारण सहना पड़ा था। वह श्राप किसी और ने नहीं, बल्कि देव ऋषि नारद मुनि ने दिया था।
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राम सीता - फोटो : सोशल मीडिया
ऐसे हुई थी भगवान राम की मृत्यु
अयोध्या आगमन के बाद राम ने कई वर्षों तक अयोध्या का राजपाट संभाला और इसके बाद गुरु वशिष्ठ व ब्रह्मा ने उनको संसार से मुक्त हो जाने का आदेश दिया। एक घटना के बाद उन्होंने जल समाधि ले ली थी।
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