वक्त कितना भी बदल जाए लेकिन कुछ चीजें हैं, जो मनुष्य के जीवन को हमेशा प्रभावित करती हैं। मसलन, शास्त्रों में कई गई ज्ञान की बातें आज भी इंसान को सही राह दिखाती हैं। हर मनुष्य अपने जीवन में ऊंचाईयों को पाना चाहता है, लेकिन जाने-अनजाने उससे कुछ गलतियां हो जाती हैं, जो उसके अपमान का कारण बनती हैं।
समाज में अक्सर अपमान का कारण बनने वाली छह बड़ी गलतियों को जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
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इंसान पर भारी पड़ती हैं ये छह गलतियां
वाणी पर संयम न रखना
मनुष्य के जीवन में वाणी का बहुत बड़ा महत्व है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि वाणी में अमृत और विष दोनो का वास होता है। यदि मनुष्य की वाणी पर विष का प्रभाव है, तो सामने वाला सुनते ही सामने वाला आग बबूला हो जाता है और यदि वाणी में अमृत का वास है तो आप अपने दुशमन को भी अपना प्रशंसक बना सकते हैं। ऐसे में वाणी पर संयम रखना अत्यंत जरूरी है।
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बच्चों की अनदेखी करना
प्रत्येक माता-पिता के लिए बच्चे उनकी बड़ी जिम्मेदारी होते हैं। जिनका उन्हें पूर ईमानदारी से पालन—पोषण करना होता है। विशेष रूप से जब तक वे अपने पैरों पर न खड़े हो जाएं। ऐसे में बच्चों की हर जरूरतें पूरा करना चाहे वह भौतिक हो या भावनात्मक, हमारा दायित्व है। इस चीज की अनदेखी भूलकर भी नहीं करना चाहिए, अन्यथा कोई दूसरा इस कमजोरी का गलत फायदा उठा सकता है। आपके बच्चों को गलत रास्ते पर ढकेल सकता है। ऐसी स्थिति में समाज में सिर्फ और सिर्फ आपका अपमान होता है।
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होड़ करना
जिस पल मनुष्य अपनी तुलना किसी और से करता है, उसी पल से उसका पतन शुरु हो जाता है। किसी से तुलना के करने पर वह केवल उसकी उपलब्धियों या तौर-तरीकों पर ही ज्यादा गौर करता है। हालांकि तुलना करते समय अक्सर व्यक्ति इस बात को भूल जाता है कि उस स्थान तक पहुंचने के लिए उसने कितनी मेहनत की होगी। जब व्यक्ति मेहनत की बजाय होड़ करना शुरू कर देता है तो वह स्वयं ही अपने नाश को निमंत्रण देना शुरु कर देता है। इस होड़ के कारण उसका बौद्धिक विकास प्रभावित होता है और उसे समाज में कई बार हंसी का पात्र बनते हुए अपमान भी सहना पड़ता है।
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सामर्थ्य से अधिक दान
दान देना शास्त्रों में बड़ा ही पुण्य कार्य माना गया है। किसी धर्म विशेष से ऊपर उठकर हमेशा जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए, लेकिन दान करते समय हमें अपनी जेब का पूरा ख्याल रखना चाहिए। कई बार ऐसा होता है कि हम अपनी आर्थिक स्थिति की अनदेखी करते हुए अपनी क्षमता से अधिक दान करते हैं या उसका दिखावा करते हैं। ऐसे में हम खुद ही कई बार पैसों की किल्लत से जूझने लगते हैं और दूसरों के आगे हाथ फैलाने की नौबत तक आ जाती है।
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सही संगत न रखना
व्यक्ति चाहे खुद कितना भी सही क्यों न हो, लेकिन समाज में उसकी छवि बनाने में सबसे बड़ा योगदान उन लोगों का होता है, जिनके साथ वह अक्सर अपना समय बिताता है। ज्ञानियों का मानना है कि गलत संगत एक कोयले की भांति होती है, जो गर्म होने पर हाथ जला देती है, तो वहीं ठंडा होने पर हाथ काले कर देती है। कहने का तात्पर्य यह कि दोनो ही सूरत में कोयला (गलत संगत) हमे नुकसान ही पहुंचाता है। यदि हमारी संगत में ऐसे लोग होंगे, तो हम चाहे कितने भी अच्छे क्यों न हो, हमें समाज उन्हीं गलत लोगों की नजर से देखता और व्यवहार करता है।
जीवनसाथी का आदर न करना
यदि हम इस सांसारिक जीवन में अपने हमसफर का साथ नहीं देते हैं या फिर अपने पार्टनर को उसका उचित सम्मान नहीं देते हैं तो उस स्थिति में उसका अपमान भी आपके ही अपमान का कारण बनता है। अमूमन लोग दूसरों के सामने अपनी पत्नी की आलोचना करते नजर आते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि कई बार दुष्ट प्रवृति के लोग इस स्थिति का लाभ लेकर आपका या आपके पार्टनर का गलत फायदा भी उठा लेते हैं। जिसके बाद आपको पछताना पड़ता है।