गुरु पूर्णिमा की रात चंद्रग्रहण की रात होगी और खास बात यह कि इस शताब्दी में इस रात सबसे लंबे समय तक पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। यह ग्रहण पूरे देश में देखा जा सकेगा। खग्रास ग्रहण उत्तरा आषाढ़ और श्रवण नक्षत्र के साथ मकर राशि में होगा। ग्रह गोचर के अनुसार, इस ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग तरह से दिखेगा।
विज्ञापन
2 of 5
गोचर में मकर राशि के केतु के साथ चंद्रमा का प्रभाव और राहु से उसका दृष्टि संबंध, साथ ही शनि और मंगल का वक्री होना विशेष घटना है। ग्रहण के ही दिन इस तरह के अशुभ योगों का बनना अच्छा नहीं माना जाता है। प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बढ़ सकती है।
विज्ञापन
3 of 5
उत्तरा आषाढ़ और श्रवण नक्षत्र में जन्म राशि और लग्न मकर है, उनके लिए अशुभ है। उन्हें चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए। चंद्रग्रहण के दौरान संयम नियम से रहना चाहिए। गंगा तट या किसी पवित्र नदी के तट पर, अपने इष्ट की आराधना और गुरु मंत्र का जप या सद् ग्रंथों का पाठ करें।
4 of 5
चंद्रग्रहण
मेष, सिंह, वृश्चिक, मीन राशियों को ग्रहण का फल शुभ होगा। वृष, कर्क, कन्या, धनु राशि के लिए मध्यम और मिथुन, तुला, मकर व कुंभ राशि के लिए ग्रहण अशुभ रहेगा। ग्रहण भारत के अलावा श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल, मलेशिया, इंडोनेशिया और एशिया महाद्वीप के अधिकांश देशों में दिखाई देगा।
साथ ही अफ्रीका, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और दक्षिणी अमेरिका आदि के देशों में ग्रहण दिखाई देगा। उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के देशों जैसे अमेरिका, कनाडा में ग्रहण बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा। ग्रहण की अवधि
1. ग्रहण पर्व काल- 3:54 घंटे
(सूतक - आषाढ़ पूर्णिमा बुधवार 27 जुलाई को ग्रहण प्रारंभ , (स्पर्श) के तीन प्रहर(9 घंटा) पहले प्रारंभ होगा।)
2. ग्रहण स्पर्श- रात 11:55 बजे
3. ग्रहण सम्मिलन- रात 1 बजे