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Surya Abhishek: नवग्रहों में सूर्य का महत्व, जानिए 12 भावों में इसका प्रभाव

Wed, 17 Apr 2024 05:31 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Surya Abhishek: सनातन धर्म में सूर्य देव का विशेष महत्व माना गया है। सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है।
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सूर्य का महत्व - फोटो : अमर उजाला
Surya Abhishek: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव का विशेष महत्व माना गया है। सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है। एक ओर जहां सूर्यदेव की तीज त्योहार में विधि विधान से पूजा की जाती है। वहीं इसका ज्योतिषीय महत्व भी देखने को मिलता है। ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियों को नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) की स्थिति और चाल से प्रभावित माना जाता है। सूर्य देव को सभी ग्रहों का अधिपति माना जाता है और साथ ही सिंह राशि का स्वामित्व भी सूर्य देव को ही प्राप्त है। सूर्य और चंद्र ग्रह 2 ही ऐसे ग्रह हैं जिन्हें 1-1 राशि का स्वामित्व प्राप्त हैं बाकी अन्य ग्रह(राहु-केतु को छोड़कर) को 2 राशियों का स्वामित्व मिला हुआ है। आइए जानते हैं नवग्रहों में सूर्य का महत्व।

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Surya Abhishek - फोटो : istock
सूर्य देव का परिवार
पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य देव के पिता का नाम कश्यप है। उनकी माता अदिति है। देवताओं में भी सूर्य का खास महत्व माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सूर्य देव की दो पत्नियां हैं, जिनका नाम संध्या और छाया है। साथ ही शनिदेव भगवान सूर्य के पुत्र हैं। यमराज और देवी यमुना को इनकी संतान माना जाता है।
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Surya Abhishek - फोटो : istock
ज्योतिष में सूर्य का महत्व
सूर्य को नवग्रहों का राजा कहा जाता है। ज्योतिष में सूर्य को पिता के भाव कर्म का स्वामी माना गया है। इसलिए पिता-पुत्र के रिश्तों में लाभ के लिए सूर्य की पूजा पुत्र को करनी चाहिए। सूर्य देव की कृपा होने से कुंडली में नकारात्मक प्रभाव देने वाले ग्रहों का प्रभाव भी कम होता है।

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Surya Abhishek - फोटो : istock
अन्य ग्रहों का प्रभाव
सूर्य सिंह राशि का स्वामी होता है। इस राशि के लोगों पर सूर्य का खास प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा अन्य ग्रहों का भी अपना विशेष महत्व होता है। आइए उनके बारे में जान लेते हैं-

मंगल- ऊर्जा और महत्वाकांक्षा को नियंत्रित करता है। इसे मेष और वृश्चिक राशि से जोड़ा गया है।

बुध- इस ग्रह बुद्धि संचार को नियंत्रित करता है। यह कन्या और मिथुन राशि से जुड़ा होता है।
 
बृहस्पति- यह ग्रह ज्ञान और बुद्धि को नियंत्रित करता है। इसे धनु और मीन राशि से जोड़ा जाता है।
 
शुक्र- इस ग्रह का प्यार और रिश्तों से जोड़कर देखा जाता है। यह वृष और तुला राशि से जुड़ा है।
 
शनि- अनुशासन और जिम्मेदारी को नियंत्रित करता है। यह मकर और कुंभ राशि से जुड़ा है।
 
राहु- अचानक और अप्रत्याशित घटनाओं को नियंत्रित करता है। कुंभ राशि से जुड़ा है।
 
केतु- आध्यात्मिकता और दार्शनिक खोज को नियंत्रित करता है। यह वृश्चिक राशि से जुड़ा हुआ है।
 
चंद्रमा- इसे  कर्क राशि का स्वामी माना गया है। 
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Surya Abhishek - फोटो : istock
सूर्य का अन्य ग्रहों से संबंध
सूर्य केंद्रीय शक्ति और ऊर्जा का स्रोत है और उनकी सभी ग्रहों से मित्रता नहीं है। ऐसे में हम आपको सूर्य ग्रह के शत्रु और मित्र के बारे में जानकारी देंगे।
सूर्य के मित्र - बृहस्पति, बुध और मंगल
तटस्थ - चंद्रमा और केतु
शत्रु - शुक्र, राहु
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Surya Abhishek - फोटो : istock
सूर्य का 12 भाव पर प्रभाव जानिए

प्रथम भाव: जिन लोगों की जन्म कुंडली में सूर्य देव पहले भाव में होते हैं, ऐसे लोग साहसी होते हैं।

दूसरा भाव: इस भाव में सूर्य बैठकर व्यक्ति को स्वाभिमानी बनाते हैं।

तीसरा भाव: यदि कुंडली के तीसरे भाव में सूर्य देव होते हैं, तो ऐसा व्यक्ति साहसी होता है।

चौथा भाव: सूर्य चौथे भाव में हों, तो व्यक्ति अपने क्षेत्र में उच्च पद प्राप्त करता है।

पांचवां भाव: सूर्य इस भाव में मिला-जुला फल प्रदान करते हैं।

छठा भाव: इस भाव में सूर्य व्यक्ति को आर्थिक रूप से संपन्न बनाते हैं।

सातवां भाव: इस भाव में सूर्य हो तो यह दांपत्य जीवन को प्रभावित करते हैं।

आठवां भाव: इस भाव का सूर्य व्यक्ति को अचानक लाभ प्रदान करता है।

नवम भाव: जन्म कुंडली के नवम भाव में सूर्य व्यक्ति को कर्मठ बनाता है।

दशम भाव: सूर्य इस भाव में बैठकर अच्छा फल प्रदान करते हैं।

एकादश भाव:  इस भाव में सूर्य होते हैं, तो वह जातक को बुद्धिमान बनाते हैं।

बारहवां भाव : इस भाव में सूर्य बहुत शुभ फलदायी नहीं माने जाते। ऐस भाव के जातक को विदेश से अच्छा लाभ होता है।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है
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