भाद्रपद महीने की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि इस वर्ष 9 सितंबर को है। कृष्ण भक्तों के लिए यह तिथि उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी श्री कृष्ण की जन्मतिथि क्योंकि इसदिन श्री कृष्ण की आत्मा कही जाने वाली देवी राधा का जन्म हुआ था जिसे राधाष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
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राधाष्टमी विशेषः इसलिए देवी राधा का हुआ पृथ्वी पर जन्म और कृष्ण से विरह का दर्द सहना पड़ा
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राध्ाा कृष्ण
देवी राधा के जन्म के पीछे एक बड़ी ही रोचक कथा है जिसका उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में आया है। एक बार देवी राधा गोलोक से कहीं बाहर गयी थी उस समय श्री कृष्ण अपनी विरजा नाम की सखी के साथ विहार कर रहे थे। संयोगवश राधा वहां आ गई।
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राधाष्टमी विशेषः इसलिए देवी राधा का हुआ पृथ्वी पर जन्म और कृष्ण से विरह का दर्द सहना पड़ा
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राधा
विरजा के साथ कृष्ण को देखकर राधा क्रोधित हो गई और कृेष्ण एवं विरजा को भला बुरा कहने लगी। लज्जावश विरजा नदी बनकर बहन लगी।
राधाष्टमी विशेषः इसलिए देवी राधा का हुआ पृथ्वी पर जन्म और कृष्ण से विरह का दर्द सहना पड़ा
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राध्ाा कृष्ण
कृष्ण के प्रति राधा के क्रोधपूर्ण शब्दों को सुनकर कृष्ण के मित्र सुदामा आवेश में आ गए। यह सुदामा कृष्ण के सखा नहीं हैं बल्कि गोलोक में रहने वाले इनके सहचर साथी हैं। सुदामा कृष्ण का पक्ष लेते हुए राधा से आवेशपूर्ण शब्दों में बात करते हैं। सुदामा के इस व्यवहार को देखकर देवी राधा नाराज हो गई।
राधाष्टमी विशेषः इसलिए देवी राधा का हुआ पृथ्वी पर जन्म और कृष्ण से विरह का दर्द सहना पड़ा
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राध्ााकृष्ण
राधा ने सुदामा को दानव रूप में जन्म लेने का शाप दे दिया। क्रोध में भरे हुए सुदामा ने भी देवी राधा को मनुष्य योनि में जन्म लेने का शाप दे दिया। राधा के शाप से सुदामा शंखचूर नाम के दानव हुए जिनका वध भगवान शिव ने किया। सुदामा के शाप के कारण देवी राधा को मनुष्य रूप में जन्म लेकर धरती पर आना पड़ा और कृष्ण से विरह का दर्द सहना पड़ा।