मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। इसलिए इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं, लेकिन मकर सक्रांति मनाई क्यों जाती है ये कम ही लोग जानते हैं। अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति मनाने के अलग-अलग कारण है, आइए जानते है इस बारे में।
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इन 6 घटनाओं के कारण हिन्दू धर्म में है मकर संक्रांति का खास महत्व
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पुराणों के अनुसार मकर सक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिए आते है, मकर राशि का स्वामी शनि है और इस दिन सूर्य देव शनि महाराज का भंडार भरते हैं।
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इन 6 घटनाओं के कारण हिन्दू धर्म में है मकर संक्रांति का खास महत्व
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ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल संभव नही, लेकिन इस दिन सूर्य खुद अपने पुत्र के घर जाते हैं। इसलिए पुराणों में यह दिन पिता-पुत्र को संबंधो में निकटता की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
इन 6 घटनाओं के कारण हिन्दू धर्म में है मकर संक्रांति का खास महत्व
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मकर संक्रांति के दिन भगवान विष्णु ने मधु कैटभ से युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। उन्होंने मधु के कंधे पर मंदार पर्वत रखकर उसे दबा दिया था। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु मधुसूदन कहलाने लगे।
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इन 6 घटनाओं के कारण हिन्दू धर्म में है मकर संक्रांति का खास महत्व
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गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भागीरथ ने अपने अपने पूर्वजों के आत्मा की शांति के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिेए मकर सक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।
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मां दुर्गा ने दानव महिषासुर का वध करने के लिए इसी दिन धरती पर कदम रखा था।
इन 6 घटनाओं के कारण हिन्दू धर्म में है मकर संक्रांति का खास महत्व
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महाभारत में पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर स्वेच्छा से शरीर का त्याग किया था, कारण यह है कि उत्तरायण में देह त्यागने वाले व्यक्ति की आत्मा मोक्ष पा लेती है या देवलोक में रहकर पुनः गर्भ में लौटती है।