भगवान श्री कृष्ण का अवतार धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। इसके लिए श्री कृष्ण ने न सिर्फ राक्षसों और असुरों का वध किया बल्कि धर्म की स्थापना के मार्ग में आने वाले अपने सगे-संबंधियों को भी परलोक पहुंचाने में कोई भेद नहीं किया। अंत में भगवान श्री कृष्ण ने यह भी कह दिया कि 'यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ! अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम !!' तो आइये देखें श्री कृष्ण ने अपने किन किन संबंधियों का वध किया।
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जब धर्म की खातिर श्री कृष्ण को करना पड़ा अपने ही रिश्तेदारों का वध
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भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले अपने मामा कंस का वध किया था। कंस उन दिनों धर्म का सबसे बड़ा शत्रु था जिसने श्री कृष्ण के 6 भाईयों की हत्या की थी और इनके माता-पिता को बंदी बना रखा था।
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जब धर्म की खातिर श्री कृष्ण को करना पड़ा अपने ही रिश्तेदारों का वध
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युधिष्ठिर के राज्याभिषेक के समय श्री कृष्ण ने अपने फुफेरे भाई शिशुपाल का वध किया था। शिशुपाल जरासंध और कंस का मित्र था और रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था। लेकिन श्री कृष्ण ने शिशुपाल को हराकर रुक्मिणी का हरण करके विवाह किया। इससे शिशुपाल श्री कृष्ण से द्वेष रखता था और युधिष्ठिर के राज्याभिषेक के समय इसने श्री कृष्ण का खूब अपमान किया और अंत में जब शिशुपाल ने 100 से अधिक अपशब्द कहे तो श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध कर दिया।
जब धर्म की खातिर श्री कृष्ण को करना पड़ा अपने ही रिश्तेदारों का वध
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घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक को उनकी माता ने कहा था कि जो पक्ष युद्ध में हारे उसकी ओर से युद्ध करना। श्री कृष्ण जानते थे कि महाभारत युद्ध में पांडव ही विजयी होंगे ऐसे में बर्बरीक अगर कौरवों की ओर से युद्ध करेगा तो पांडव उसे परास्त नहीं कर पाएंगे। इसलिए श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उसका सिर मांग लिया। बर्बरीक का कटा सिर पूरा महाभारत का युद्ध देखता रहा। यही बाद में खाटू श्याम के नाम से जाने गए।