रामायण से लेकर गीता और महाभारत तक सभी में बताया गया है कि मनुष्य के अंदर अगर यह 6 बुरी आदतें हैं तो उनका विनाश तय है। यह 6 बुरी आदतें ऐसी हैं जो न सिर्फ आपको आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि आपके पारिवारिक जीवन और सुख शांति का भी नाश कर डालते हैं। इसलिए आपके अंदर भी यह बुरी आदतें हैं तो उन्हें दूर करने की कोशिश करें। आइये देखें कि यह 6 बुरी आदतें क्या हैं।
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इन 6 बुरी आदतों के कारण हर व्यक्ति का होता है धन और सुख नाश
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प्यार
किसी भी व्यक्ति के धन और सुख का नाश करने वाला सबसे पहला कारण काम को बताया गया है। काम भाव से पीड़ित व्यक्ति अपने धन का नाश करता है। कामी व्यक्ति अपने परिवार की सुख-शांति का नाश कर बैठता है। पुराणों में इसके कई उदाहरण मौजूद हैं। देवराज इंद्र भी कई बार काम भाव के कारण अपनी सत्ता गंवा चुके हैं। रावण और दुर्योधन के विनाश की एक वजह यह भी थी।
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इन 6 बुरी आदतों के कारण हर व्यक्ति का होता है धन और सुख नाश
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क्रोध
क्रोध को दूसरा कारण माना गया है जो व्यक्ति का सब कुछ छीन लेता है। शास्त्रों में बताया गया है कि परिस्थिति जब गंभीर हो उस समय क्रोध को अपने पर बिल्कुल भी हावी नहीं होने देना चाहिए। विपत्ति में जो लोग संयम खो देते हैं और क्रोध करते हैं उनका अक्सर नाश होता है। इसका कारण यह है कि क्रोध मनुष्य के विवेक को नष्ट कर देता है जिससे उचित अनुचित का विचार नहीं रहता और मनुष्य अपना ही नुकसान कर बैठता है। शास्त्रों में क्रोध को असुरों का गुण कहा गया है और इसी कारण असुर हमेशा देवताओं से हारे हैं।
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राम रावण
अहंकार को विनाश का तीसरा कारण माना गया है। पुराणों में कई उदाहरण मौजूद हैं जो बताते हैं कि अहंकार के कारण व्यक्ति का सबकुछ समाप्त हो गया। रावण, हिरण्यकश्यप, कंश, दुर्योधन, जरासंध, बालि सभी अपने अहंकार के कारण सब कुछ लुटा बैठे।
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धृतराष्ट्र
मनुष्य को विनाश की ओर ले जाने वाला चौथा कारण है मोह। जब किसी भी चीज से व्यक्ति बहुत अधिक मोह करने लगता है तो उसके लिए गलत सही का विचार समाप्त हो जाता है और व्यक्ति अपनी मर्यादा से भटक जाता है और फिर विनाश की ओर जाने लगता है। धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र से मोह किया परिणाम द्रौपदी का चीर हरण हुआ, महाभारत का महाविनाश हुआ। राजा भरत ने हिरण से मोह किया तो अगले जन्म में खुद हिरण बने।
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महाभारत
लोभ लालच पांचवां कारण है जो मनुष्य को विनाश की ओर ले जाता है। लोग मनुष्य से वह भी छीन ले जाता है जो उसके पास होता है इसलिए शास्त्र कहता है संतोषम् परम सुखम्। यानी संतोष सबसे बड़ा सुख है। जो व्यक्ति दूसरों की संपत्ति को पाने की लालच करता है उसका सबकुछ नष्ट हो जाता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण महाभारत है। कौरवों ने पांडवों के धन का लोभ किया परिणाम यह हुआ कि धन और जन दोनों का नुकसान हुआ।
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कर्ण दुर्योधन महाभारत
बहुत से लोगों में आदत होती है कि किसी की खुशी और उन्नति से मन में द्वेष उत्पन्न होने लगता है। आम भाषा में कहें तो मन में जलन होने लगता है। यह आदत भी मनुष्य को नाश की ओर ले जाती है। जलन की भावना दूसरों का नहीं बल्कि खुद का ही नाश कर देती है। कर्ण महान योद्धा थे लेकिन उनके मन में अर्जुन के प्रति द्वेष की भावना थी। इस भावना ने कर्ण को खलनायक की श्रेणी में ला दिया और अर्जुन के हाथों ही मृत्यु के मुंह में पहुंचा दिया।